कोरोना ठीक करने की दवा बना रहे थे, खुद पर टेस्ट किया और मौत हो गई

कोरोना ठीक करने की दवा बना रहे थे, खुद पर टेस्ट किया और मौत हो गई



shivsen died after self made corona vaccine

कोरोना वायरस का अभी तक कोई इलाज नहीं मिला है. कई लोग दवा या वैक्सीन खोजने के काम में लगे हैं. भारत में ऐसी कोशिशें हो रही हैं. लेकिन इसी प्रयास में एक व्यक्ति की मौत हो गई. मामला तमिलनाडु का है. यहां एक आयुर्वेदिक कंपनी के दो कर्मचारियों ने कोरोना के इलाज के लिए बनाई गई कथित दवा खाई. इनमें से एक की मौत हो गई. जबकि दूसरा अस्पताल में भर्ती है. मरने वाले की पहचान के. शिवनेसन के रूप में हुई है. वहीं राजकुमार का अस्पताल में इलाज चल रहा है.

कई दिनों से दवा बनाने में लगे हुए थे 

द हिंदू की खबर के अनुसार, ये दोनों सुजाता बायोटेक नाम की आयुर्वेदिक कंपनी में काम करते थे. डॉ. राजकुमार कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. वहीं शिवनेसन फार्मासिस्ट और प्रोडक्शन मैनेजर की पोस्ट पर थे. दोनों कोरोना के इलाज के लिए दवा बनाने में लगे हुए थे. 7 मई को शिवनेसन ने  कोरोना के इलाज के लिए बनाई जा रही दवा का कुछ हिस्सा राजकुमार को दिया. इसे लेने पर वे बेहोश हो गए. जब राजकुमार को होश में लाने की कोशिश की जा रही थी. उसी समय शिवनेसन ने भी दवा ले ली और वह भी बेहोश हो गए.



के शिवनेसन की चेन्नई के अस्पताल में मौत हो गई.

दोनों को पास के अस्पताल ले जाया गया. शिवनेसन ने ज्यादा दवा पी थी. ऐसे में उन्हें बचाया नहीं जा सका. वहीं राजकुमार ने दवा की थोड़ी सी मात्रा ही ली थी. उनकी हालत स्थिर है. इलाज चल रहा है. वहीं इस मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के मीडिया मैनेजर एनएस वासन ने कहा कि हमारी कंपनी के सभी प्रॉडक्ट आयुर्वेदिक है. वहीं शिवनेसन जिस दवा का टेस्ट कर रहे थे वह कैमिकल प्रॉडक्ट था.


कोरोना का नियम बदला, अब बिना टेस्ट ही घर भेजे जाएंगे कम बीमार मरीज


कोरोना का नियम बदला, अब बिना टेस्ट ही घर भेजे जाएंगे कम बीमार मरीज

कोलकाता में मां और बेटे की मूर्ति को भी मास्क पहनाकर लोगों से मास्क पहनने की अपील की गई है. 


केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस के मरीजों को अस्पताल से छुट्टी देने के निर्देशों में बदलाव किया है. इसके तहत अब गंभीर रूप से बीमार मरीजों का ही डिस्चार्ज से पहले टेस्ट होगा. और उनकी रिपोर्ट नेगेटिव  आने का इंतजार किया जाएगा. बाकी मरीजों को बिना टेस्ट के छुट्टी दे दी जाएगी. साथ ही छुट्टी मिलने के बाद घर पर केवल सात दिन आइसोलेशन में रहना होगा.  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 8 मई को इस बारे में गाइडलाइंस जारी कर दी. अब तक नियम था कि कोरोना पॉजीटिव व्यक्ति की जब तक 24 घंटे में दो रिपोर्ट नेगेटिव नहीं आती थी. उसे डिस्चार्ज नहीं करते थे.


क्या है नई गाइडलाइंस

बहुत हल्के, हल्के या संक्रमण से पहले के लक्षणों वाले मरीज

# ऐसे मरीजों को कोविड केयर फैसिलिटी में भर्ती किया जाएगा.

# यहां पर रोजाना शरीर का तापमान और ऑक्सीजन लेवल की जांच होगी.



# 10 दिन बाद इस तरह के मरीजों को छुट्टी दी जा सकती है. बशर्तें उन्हें लगातार तीन दिन तक बुखार न हो.

# छुट्टूी देते समय किसी जांच की जरूरत नहीं.
# ऐसे मरीजों को घर पर सात दिन तक बाकी सब लोगों से अलग रहना होगा.
# छुट्टी देने से पहले अगर किसी मरीज का ऑक्सीजन लेवल 95 प्रतिशत से नीचे जाता है तो उन्हें डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर भेजा जाएगा.


मॉडरेट लक्षणों वाले मरीज

# ऐसे मरीजों को डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर में भर्ती किया जाएगा. इन्हें ऑक्सीजन बेड दिया जाएगा.



# अगर तीन दिन बुखार नहीं आता है, अगले चार दिन तक 
ऑक्सीजन लेवल 95 प्रतिशत तक ही रहता है तो मरीज को 10 दिन में डिस्चार्ज किया जा सकता है.

# इन्हें भी छुट्टी देने से पहले टेस्ट की जरूरत नहीं होगी.

# इन्हें भी सात दिन तक घर में बाकी सब लोगों से अलग रहना होगा.

# जिन मरीजों का तीन दिन में बुखार नहीं उतरा और जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत होगी. उन्हें बीमारी के लक्षण हटने पर ही छुट्टी दी जाएगी. साथ ही यह भी देख जाएगा कि लगातार तीन दिन तक उनका ऑक्सीजन लेवल ठीक रहा हो.

गंभीर रूप से बीमार

# ऐसे मरीजों को पूरी तरह से ठीक होने पर ही छुट्टी दी जाएगी.

# बीमारी के लक्षण समाप्त होने के अलावा RT-PCR टेस्ट एक बार नेगेटिव आने पर छुट्टी दी जाएगी.


फिर से बीमारी के लक्षण दिखने पर

# छुट्टी मिलने के बाद अगर फिर से खांसी, बुखार या सांस लेने में दिक्कत होती है तो कोविड केयर सेंटर से संपर्क करना होगा. राज्य की हेल्पलाइन सेवा या 1075 पर भी फोन किया जा सकता है.

# 14 दिन तक टेली कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उसकी सेहत पर नज़र रखी जाएगी.

सरकार के फैसले पर सवाल

सरकार के इस फैसले पर सवाल भी उठे हैं. एम्स के रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी श्रीनिवास राजकुमार ने द हिंदू से कहा कि यह फैसले खतरा बढ़ा सकता है. उन्होंने कहा कि बिना जांच किए मरीजों को भेजे जाने पर दूसरे लोगों में वायरस फैल सकता है. अगर सरकार पर्याप्त संख्या में टेस्टिंग सुविधा तैयार नहीं कर पाई तो 40 दिन तक क्या कर रही थी


सेहत से जुड़ी अफवाह पर बोले अमित शाह- मैं पूरी तरह से स्वस्थ, कोई बीमारी नहीं

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के स्वास्थ्य को लेकर पिछले कुछ दिनों से अलग-अलग तरह की अफवाहें सामने आ रही थी. अब खुद अमित शाह ने अपने स्वास्थ्य को लेकर जानकारी दी है. साथ ही अफवाहों को दरकिनार किया है.

amit shah pic


केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के स्वास्थ्य को लेकर पिछले कुछ दिनों से अलग-अलग तरह की अफवाहें सामने आ रही थी. अब खुद अमित शाह ने अपने स्वास्थ्य को लेकर जानकारी दी है. साथ ही अफवाहों को दरकिनार करते हुए कहा है कि वो पूरी तरह से स्वस्थ हैं

अमित शाह ने जानकारी दी है कि वो पूरी तरह से स्वस्थ हैं और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई बीमारी नहीं है. इसके साथ ही अमित शाह ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के इस वक्त में देर रात तक काम करने के कारण इन सब पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया.



वहीं अमित शाह ने कहा, 'पिछले कई दिनों से कुछ मित्रों ने सोशल मीडिया के माध्यम से मेरे स्वास्थ्य के बारे में कई मनगढ़ंत अफवाएं फैलाई हैं. यहां तक कि कई लोगों ने मेरी मृत्यु के लिए भी ट्वीट कर दुआ मांगी है.


औरंगाबाद ट्रेन हादसे में बच गए मज़दूर ने कहा- हमने साथियों को चिल्लाकर जगाने की कोशिश की थी


महाराष्ट्र के औरंगाबाद में 8 मई को 16 मजदूरों की ट्रेन हादसे में मौत हो गई. कुल बीस मज़दूरों में चार की जान बच गई. इनमें से एक घायल है. इन लोगों ने कहा कि उन्होंने बाकी साथियों को जगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक मालगाड़ी उनके ऊपर से गुज़र गई. ये सभी लोग जालना ज़िले की स्टील फैक्ट्री में काम करते थे और मध्य प्रदेश के भुसावल जा रहे थे. इनमें से ज़्यादातर मज़दूर शहडोल और उमरिया ज़िले के रहने वाले थे.

डेक्कन हेराल्ड की एक ख़बर के मुताबिक, मध्य प्रदेश के उमरिया ज़िले के रहने वाले, हादसे में बचे वीरेंद्र सिंह गौड़ बताते हैं कि सब कुछ एक झटके में हुआ. वो कहते हैं,

मैं घर पर अपने बीवी, बच्चों, मां-बाप को लेकर चिंतित था. हमने एक दिन पहले शाम को चलना शुरू किया. सड़कों और रेलवे ट्रैक के किनारे. हम थक गए. सुबह चार बजे के करीब हमने सोचा थोड़ा आराम कर लें. हमें लगा ट्रेन आएगी नहीं. तीन लोग थोड़ी दूरी पर थे. हमने मालगाड़ी को आते देखा तो हम चिल्लाए लेकिन ट्रेन गुज़र गई.

‘हमें नहीं पता था हम कहां हैं’

गांव कनेक्शन के मुताबिक, वीरेंद्र सिंह कहते हैं,

हमें पता था कि रास्ते में खाने की दिक्कत होगी इसलिए हमने रोटी और अचार रख लिया था. रातभर चलते रहे. कुछ लोगों को नींद भी आ रही थी. तब हमें ये नहीं पता था कि हम किस जगह हैं लेकिन बहुत देर से रेल की पटरी के किनारे चल रहे थे.

‘लगा कि कोई बुरा सपना देखा है’

चार लोग जिनकी जान बची, उनमें इंद्रलाल धुर्वे, वीरेंद्र सिंह, शिवमन सिंह गौर और सज्जन सिंह हैं. सज्जन सिंह घटना में घायल हुए हैं. दैनिक भास्कर के मुताबिक,  सज्जन सिंह ने बताया,

पहले तो लगा कि कोई बुरा सपना देखा है. पल भर में हकीकत पर यकीन हो गया. 20 में से चार ज़िंदा बचे. डर को थोड़ा दूर किया. ट्रैक से कुछ दूर बने एक घर पहुंचे. मदद मांगी. उन्होंने पानी पिलाया. फिर पुलिस को जानकारी दी.

मध्य प्रदेश के लिए ट्रेन पकड़ना चाहते थे: पुलिस

जालना जिले के एसपी एस चैतन्य ने बताया,

‘हादसे का शिकार हुए मज़दूर यहां एसआरजी स्टील कंपनी में काम करते थे. एसआरजी स्टील मिल के 20 मजदूर पैदल ही औरंगाबाद की तरफ निकल पड़े. मज़दूरों ने औरंगाबाद जाने का फैसला किया क्योंकि उन्हें लगा कि उन्हें वहां से मध्य प्रदेश के लिए ट्रेन मिल सकती है.’

मृतकों के नाम

रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि मालगाड़ी में पेट्रोल के खाली कंटेनर थे. ये मनमाड तहसील स्थित पानेवाडी जा रही थी. दुर्घटना के बाद यह अगले स्टेशन पर रुक गई. मृतकों की पहचान धन सिंह गोंड, निर्वेश सिंह गोंड, बुद्धराज सिंह गोंड, अच्छेलाल सिंह, रबेंद्र सिंह गोंड, सुरेश सिंह कौल, राजबोहरम पारस सिंह, धर्मेंद्र सिंह गोंड, बिगेंद्र सिंह, प्रदीप सिंह गोंड, संतोष नापित, बृजेश भैयादीन, मुनीम सिंह, नेमशाह सिंह, श्रीदयाल सिंह, दीपक सिंह गोंड है. इनमें दस लोग शहडोल ज़िले से हैं.

जारी है मजदूरों का पलायन 



कोरोना ठीक करने की दवा बना रहे थे, खुद पर टेस्ट किया और मौत हो गई कोरोना ठीक करने की दवा बना रहे थे, खुद पर टेस्ट किया और मौत हो गई Reviewed by alok kumar on Saturday, May 09, 2020 Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.