जब जिंदा थे तो कोई गाड़ी लेने नहीं आई, अब लाश उठाने के लिए स्पेशल ट्रेन

Corona Live: देश में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 59,713 के पार, अब तक 1985 लोगों की गई जान


Corona Live News : देश में कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है.  जबकि कोरोना की चपेट में आकर अब तक 1985 लोगों की मौत हो चुकी है. अच्छी बात यह है कि 17887 कोरोना (Corona) मरीज ठीक भी हुए हैं. महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और मध्य प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है.




 इस बीच मिशन वंदे भारत के तहत विदेशों से भारतीयों को लाने का सिलसिला जारी है. स्वदेश पहुंचते ही इन्हें 14 दिनों के लिए क्वारंटीन किया जा रहा है. 

Aurangabad Train Accident: जब जिंदा थे तो कोई गाड़ी लेने नहीं आई, अब लाश उठाने के लिए स्पेशल ट्रेन


कोरोना काल में मजदूरों के पलायन को लेकर कई दर्द भरी कहानियां सामने आ रही हैं.. कल सुबह महाराष्ट्र के औरंगाबाद से ऐसी ही एक दर्दनाक खबर आई.. पैदल थके हारे मजदूर आराम करने पटरी पर लेटे.. अचानक आई मालगाड़ी की चपेट में आने से 16 मजदूरों की मौत हो गई.. मजदूर तो चले गए लेकिन उनकी बेबसी अब भी जारी है. अब भी वो पैदल ही घर पहुंचने को मजबूर हैं.


औरंगाबाद ट्रेन हादसा: मृतक की पत्नी ने कहा, 'जितना पैसा सरकार अब दे रही है, उससे कम में ही मेरा पति जिंदा घर आ जाता'

शुक्रवार आठ मई को महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रेल पटरी पर जिन 16 मजदूरों की मौत हुई उनमें से पुष्पा सिंह के पति बिरगेंद्र सिंह भी थे। पुष्पा और बिरगेंद्र सिंह की पुरानी फोटो। हादसे में सभी 16 मृतक मध्य प्रदेश के उमरिया और शहडोल जिले के थे। जिला उमरिया, पंचायत ममान के कुल चार लोगों की मौत इस हादसे में हो गई जिसमें से गांव नेऊसा के तीन लोग थे। 


इसी गांव के बिरगेंद्र सिंह जो चार महीने पहले ही औरंगाबााद कमाने गये थे। बिरगेंद्र 10वीं फेल थे। गाँव में कोई काम नहीं मिल रहा था, जमीन भी नहीं थी कि खेती कर पाते। बेटी के जन्म के एक साल बाद पत्नी के कहने पर ये कमाने के लिए शहर चले गये ताकि बेटी को पढ़ा लिखाकर कुछ बना सकें। "कमाने के लिए मैंने ही भेजा था, पर मैं नहीं जानती थी कि ये सब हो जाएगा। अब पछता रही हूं।" पति को शहर भेजने के लिए पुष्पा खुद को कोस रही हैं। पुष्पा अपने पति बिरगेंद्र के आखिरी शब्द याद कर रही थीं जो निकलने से पहले सात मई की शाम को उन्होंने पुष्पा से कहे थे, "हम निकल चुके हैं, भुसावल से ट्रेन मिलेगी। हम वहीं जा रहे हैं, एक दो दिन में घर आ जाऊंगा। अब फोन मत करना, बैटरी चार्ज नहीं है।" 

गाँव की सरपंच ने जब 10 बजे के आसपास पुष्पा को बिरगेंद्र के मौत की खबर दी। सरपंच के शब्दों पर पुष्पा को भरोसा ही नहीं था, तुरंत उसने अपने पति को फोन किया तो फोन बंद था। "जब उनका फोन बंद मिला तो मुझे भरोसा हो गया। मेरे पति के साथ उनके बड़े भाई और उनका चचेरा भाई प्रदीप भी आ रहा था, प्रदीप (22 वर्ष) भी नहीं बचा।" यह भी पढ़ें- Lockdown के दौरान 300 से ज्यादा मौतें ऐसी हुईं जिनकी चर्चा नहीं हुई, क्या उनकी जान बचाई जा सकती थी? शहडोल में मृतकों के घर पहुंची स्थानीय पुलिस। औरंगाबाद के जालना से शहडोल की दूरी लगभग 850 किलोमीटर है। बिरगेंद्र जालना की एक सरिया कंपनी में लोहा पीटने का काम करते थे। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सरकार ने सभी मृतकों को 5-5 लाख रुपए देने की घोषणा की है। ममान ग्राम पंचायत की सरपंच भागवती बैग गाँव कनेक्शन को बताती हैं, "पैसे तो खत्म हो जाएंगे। मेरी मांग है कि मृतक के घर वालों को नौकरी मिले जिससे उन्हें आने वाले समय में दिक्कत न हो।" इस ट्रेन हादसे में बिरगेंद्र के बड़े भाई वीरेंद्र सिंह (25) इसलिए बच गये क्योंकि वो पटरी के किनारे लेटे थे। वीरेंद्र सिंह गांव कनेक्शन को फोन पर बताते हैं, "सभी लोग थक गये थे। हमने सोचा कि ट्रेन तो आयेगी नहीं, थोड़ा आराम कर लेते हैं। कुछ लोग पटरी पर ही सो गये और कुछ लोग किनारे।

 अभी सोये हुए कुछ ही देर हुआ था कि ट्रेन आ गई। उसके बाद जितने लोग पटरी पर सोये थे हम उन्हें पहचान भी नहीं पा रहे थे।" वीरेंद्र सिंह सात मई की शाम करीब सात बजे 20 लोगों के साथ अपने-अपने गाँव के लिए निकले थे। अपने साथियों के बीते रात के वाकया वीरेंद्र सिंह बता रहे थे, "हमें पता था कि रास्ते में खाने की दिक्कत होगी इसलिए हमने रोटी और अचार रख लिया था। रातभर चलते रहे। कुछ लोगों को नींद भी आ रही थी। समय यही सुबह के चार बज रहे थे। तब हमें यह नहीं पता था कि हम किस जगह है लेकिन बहुत देर से रेल की पटरी के किनारे चल रहे थे। अब घर जाकर पता नहीं क्या जवाब दूंगा।"


अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बोले- चीन के हाथों की कठपुतली बना WHO, जल्द लूंगा फैसला


trump  reaction on china for corona

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन अमेरिका से फंड लेकर चीन के लिए काम कर रहा था. लिहाजा मैं बहुत जल्द एक फैसला लेने जा रहा हूं. ट्रंप ने सवाल किया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन को अमेरिका 50 करोड़ डॉलर दे रहा है, जबकि चीन सिर्फ 3.8 करोड़ डॉलर दे रहा है. इसके बावजूद क्या विश्व स्वास्थ्य संगठन को चीन बताएगा कि उसको क्या करना और कब करना है.

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जब जिंदा थे तो कोई गाड़ी लेने नहीं आई, अब लाश उठाने के लिए स्पेशल ट्रेन जब जिंदा थे तो कोई गाड़ी लेने नहीं आई, अब लाश उठाने के लिए स्पेशल ट्रेन Reviewed by alok kumar on Friday, May 08, 2020 Rating: 5

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