लॉकडाउन 4.0 अब कैसे कटेंगे दिन यारों

जानें- लॉकडाउन 4.0 में क्या-क्या खुलेगा और किस पर जारी रहेगी पाबंदी

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जानें- लॉकडाउन 4.0 में क्या-क्या खुलेगा और किस पर जारी रहेगी पाबंदी
देश में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए केंद्र सरकार ने लॉकडाउन 4.0 लगाने का फैसला किया है. 17 मई को लॉकडाउन 3.0 की मियाद खत्म होने के बाद सोमवार को गृह मंत्रालय ने 31 मई तक लॉकडाउन को बढ़ाए जाने का आदेश जारी कर दिया है. हालांकि पीएम मोदी के दिए संकेत के मुताबिक लॉकडाउन 4.0 में कुछ चीजों में छूट दी गई है. ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि लॉकडाउन 4.0 में क्या-क्या खुलेगा और किन चीजों पर पाबंदियां जारी रहेंगी.

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जानें- लॉकडाउन 4.0 में क्या-क्या खुलेगा और किस पर जारी रहेगी पाबंदी
लॉकडाउन 4.0 में भी सरकार ने स्कूल- कॉलेज बंद रखने का फैसला किया है. लेकिन ऑनलाइन क्लास और कोर्स जारी रह सकते हैं.


जानें- लॉकडाउन 4.0 में क्या-क्या खुलेगा और किस पर जारी रहेगी पाबंदी
सरकार ने 31 मई तक घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ान सेवा को भी बंद रखने का फैसला लिया है. ऐसा कहा गया है कि एयरपोर्ट और फ्लाइट में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना काफी मुश्किल है, ऐसे में उड़ानें फिलहाल बंद ही रहेंगी.

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जानें- लॉकडाउन 4.0 में क्या-क्या खुलेगा और किस पर जारी रहेगी पाबंदी

केंद्र सरकार ने पूरे देश में मेट्रो ट्रेन सेवा को भी 31 मई तक शुरू नहीं करने का निर्णय किया है. हालांकि दिल्ली मेट्रो की ओर से नए नियमों के साथ मेट्रो परिचालन की तैयारियां की जा रही हैं लेकिन केंद्र की मंजूरी न मिलने पर उसका परिचालन भी ठप रहेगा.


जानें- लॉकडाउन 4.0 में क्या-क्या खुलेगा और किस पर जारी रहेगी पाबंदी
सरकार ने शर्तों के साथ बस सेवा को शुरू करने का फैसला किया है. हालांकि इस पर अंतिम निर्णय राज्य सरकारों पर छोड़ा गया है. दो राज्य आपसी सहमति के हिसाब से एक से दूसरे राज्य में बसों के परिचालन की इजाजत दे सकते हैं.


जानें- लॉकडाउन 4.0 में क्या-क्या खुलेगा और किस पर जारी रहेगी पाबंदी
सरकार ने लॉकडाउन 4 में मॉल, सिनेमा हॉल और जिम को भी बंद रखने का फैसला किया है. रेस्त्रां से सिर्फ होम डिलीवरी होगी. साथ ही बार्बर और सैलून की दुकानें खोलने पर भी राज्य सरकार को ही फैसला करना है. अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान जैसे मिठाई या अन्य दुकानों को खोलने पर राज्य सरकारें निर्णय लेंगी. किसी भी कंटेनमेंट जोन में इसकी इजाजत नहीं होगी.



जानें- लॉकडाउन 4.0 में क्या-क्या खुलेगा और किस पर जारी रहेगी पाबंदी
धार्मिक स्थल भी 31 मई तक बंद रहेंगे. साफ है कि इस बार ईद का पर्व लॉकडाउन के दौरान ही मनाया जाएगा. इससे पहले भी नवरात्र का त्योहार भी लॉकडाउन के बीच ही मनाया गया था.


जानें- लॉकडाउन 4.0 में क्या-क्या खुलेगा और किस पर जारी रहेगी पाबंदी
केंद्र सरकार ने अब लॉकडाउन 4 के दौरान रेड, ओरेंज, ग्रीन जोन निर्धारित करने का फैसला भी राज्यों पर छोड़ दिया है. साथ ही बफर और कंटेनमेंट जोन और बनाए गए हैं.


बीमार बेटे को चारपाई पर लेकर 800 KM के सफर पर निकला पिता




लॉकडाउन के दौरान ट्रेन और बस सेवा बंद है जिससे हजारों मजदूर पैदल ही अपने राज्य और घर के लिए निकल पड़े हैं. सड़कों पर ऐसे गरीब कामगारों की भारी भीड़ है. इसी दौरान कानपुर हाइवे पर जो दृश्य नजर आया वो देखकर आपका दिल भी पसीज जाएगा. दरअसल एक पिता अपने बीमार बेटे को चारपाई पर लिटाकर पैदल ही लुधियाना से सिंगरैली के लिए निकल पड़ा. बता दें कि ये पिता अपने बीमार बेटे को लेकर 800 किलोमीटर की यात्रा कर रहा है.


बीमार बेटे को चारपाई पर लेकर 800 KM के सफर पर निकला पिता
बीमार युवक के पिता ने बताया कि बीते 15 दिनों से वो पैदल चलकर कानपुर पहुंचा था जहां पुलिस ने उसे देखा तो एक ट्रक पर बैठा दिया जिससे वो प्रयागराज तक पहुंच जाए. अब उस लाचार पिता का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.


बीमार बेटे को चारपाई पर लेकर 800 KM के सफर पर निकला पिता
युवक के पिता राजकुमार ने बताया कि उनके बेटे की गर्दन टूटी हुई है और उसे लेकर बीते 15 दिनों से लगातार पैदल चल रहे हैं ताकि अपने घर सिंगरौली पहुंच सकें. उन्होंने बताया कि इतने दिनों में उन्हें कहीं भी भरपेट खाना तक नसीब नहीं हुआ.


बीमार बेटे को चारपाई पर लेकर 800 KM के सफर पर निकला पिता
सिंगरौली के रहने वाले राजकुमार ने बताया कि वो और उनका पूरा परिवार लुधियाना में काम करता था. कोरोना महामारी की वजह से काम छूट गया जिससे खाने पर भी आफत आ गई. भोजन नहीं मिल पाने के कारण घर जाने को मजबूर हो गए.


बीमार बेटे को चारपाई पर लेकर 800 KM के सफर पर निकला पिता
ऐसे में उनके लिए पैदल घर जाना उस वक्त और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया जब 15 साल के बेटे बृजेश को गर्दन में चोट लग गई और वो चलने में असर्मथ हो गया.



बीमार बेटे को चारपाई पर लेकर 800 KM के सफर पर निकला पिता
पिता अपने बेटे को एक चारपाई पर लिटाकर रस्सी के सहारे अपने घर के लिए निकल गए. राजकुमार के साथ उसके गांव के 15 लोग और भी थे जो बारी- बारी से उनके बेटे को कंधे पर लेकर कई किलोमीटर तक पैदल चल रहे हैं.

मज़दूरों ने कोरोना-कोरोना कहकर अमृत को ट्रक से उतारा, लेकिन दोस्त याकूब ने नहीं छोड़ा साथ


दोनों गुजरात के सूरत में कपड़ा फैक्ट्री में काम करते थे. कोरोना के संदेह में अमृत को ट्रक से उतारा गया तो याकूब भी उसके साथ उतर गया. लेकिन अमृत की जान नहीं बची.


कोरोना वायरस और लॉकडाउन अपने साथ निराशा का दौर लेकर आए हैं. किसी को पता नहीं ये सब कब रुकने वाला है. फिर भी इंसान जूझ रहा है. जी रहा है. मर रहा है. आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है. बीच-बीच में कुछ ख़बरें आती हैं तो थोड़ा ठीक लगता है. भले उस ख़बर का भी एक हिस्सा दु:ख में डूबा हो.

पलायन का दौर जारी है. मध्य प्रदेश का शिवपुरी ज़िला. यहां एक ट्रक से अलग-अलग जगहों के लिए मज़दूर लौट रहे थे. 24 साल का अमृत यूपी के बस्ती ज़िले में अपने घर जाना चाहता था. शिवपुरी-झांसी रास्ते में अमृत की तबीयत बिगड़ने लगी. बुखार, चक्कर और मितली. टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के मुताबिक, साथ के मज़दूरों ने कोरोना वायरस की आशंका जताई और उसे ट्रक से उतरवा दिया. उसका साथ छोड़ दिया. लेकिन एक शख्स ने साथ नहीं छोड़ा. उसका दोस्त याकूब मोहम्मद भी ट्रक से उतर गया. उसका ख्याल रखने के लिए. बेहोशी की हालत में अमृत का सिर गोद में रखा. पानी पिलाया. गाड़ियां रोकने की कोशिश की. कुछ लोगों की मदद से अमृत को अस्पताल पहुंचाया गया. अमृत की तबीयत ज़्यादा बिगड़ चुकी थी. इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

सूरत की फैक्ट्री में काम करते थे

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, 23 साल के याकूब मोहम्मद ने कहा,

हम गुजरात के सूरत में फैक्ट्री मशीन में कपड़ा बुनने का काम करते थे. लॉकडाउन में फैक्ट्री बंद हो गई. सूरत से ट्रक में चार-चार हज़ार रुपए किराया देकर नासिक, इंदौर होते हुए कानपुर लौट रहे थे. रास्ते में अमृत की तबीयत खराब हो गई. बुखार आया. उल्टी की हालत हुई लेकिन उल्टी हुई नहीं. ट्रक में बैठे पचास-साठ लोग विरोध करने लगे कि उसे उतारा जाए. ट्रकवाले ने उसे उतार दिया तो उसकी देख-भाल के लिए मैं भी उतर गया.


वहीं, ज़िला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर पीके खरे ने कहा कि मृतक अमृत और उसके साथी याकूब मोहम्मद दोनों का कोरोना टेस्ट कराया गया है. अभी रिपोर्ट का इंतज़ार है. अमृत का सिर गोद में रखे याकूब मोहम्मद की फोटो किसी ने खींच ली, जो सोशल मीडिया पर फैलने लगी. कहा गया कि इस दौर में जब कोरोना वायरस को भी सांप्रदायिकता से जोड़ दिया गया है, ऐसी तस्वीरें बताती हैं कि कुछ चीजें धर्म-मज़हब से ऊपर होती हैं. कोरोना का दौर खत्म हो जाना चाहिए. ऐसी कहानियों का दौर नहीं खत्म होना चाहिए.

लॉकडाउन 4.0 अब कैसे कटेंगे दिन यारों लॉकडाउन 4.0 अब कैसे कटेंगे दिन यारों Reviewed by alok kumar on Sunday, May 17, 2020 Rating: 5

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