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फ्रीज़र में रखा नूडल खाने से एक ही परिवार के नौ लोगों की मौत हो गई

 फ्रीज़र में रखा नूडल खाने से एक ही परिवार के नौ लोगों की मौत हो गई


चीन का हेइलोंगजियांग प्रांत. यहां जीशी नाम की एक सिटी है. इस सिटी में रहने वाले एक परिवार के 9 लोगों ने हाल ही में दम तोड़ दिया. क्योंकि परिवार ने फ्रीज़र में रखा एक साल पुराना नूडल खाया था. वेबसाइट ‘इंडिपेंडेंट’ के मुताबिक, 5 अक्टूबर को ये परिवार साथ में नाश्ता करने के लिए इकट्ठा हुआ था. कुल 12 लोग थे. इनमें से तीन बच्चे, जिन्हें इस नूडल का स्वाद पसंद नहीं था, उन्होंने नहीं खाया. बाकियों ने खा लिया. तबीयत बिगड़ी. अस्पताल में एडमिट हुए. 11 अक्टूबर तक 8 लोगों की मौत हो गई. वहीं 47 बरस की एक महिला ने 19 अक्टूबर को दम तोड़ दिया.

Noodles


जिस नूडल को खाने के बाद तबीयत बिगड़ी, वो होममेड नूडल था. फरमेंटेड कॉर्न फ्लॉर, यानी खमीरीकृत मक्के का आटे से बना हुआ था, जिसे सौन्तांग्ज़ी (Suantangzi) कहते हैं. ये नूडल एक साल से फ्रीज़र में रखा हुआ था. चीन के अधिकारियों का कहना है कि नूडल में मौजूद बॉन्ग्क्रेकिक (bongkrekic) एसिड की वजह से मौत हुई है. अधिकारियों ने ज़हर देने की संभावनाओं को दरकिनार किया है.


इस हादसे के बाद नेशनल हेल्थ कमिशन ने मंगलवार यानी 20 अक्टूबर को एक चेतावनी जारी की. लोगों से अपील की कि फर्मेंट किए गए चावल या आटे से बना खाना न खाएं. चाइना डेली की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रांत के हेल्थ कमिशन ने बताया कि मृतकों में गैस्ट्रिक फ्लूइड और कॉर्न नूडल में हाई कॉन्संट्रेशन वाला बॉन्ग्क्रेकिक एसिड मिला है. ये एसिड सांस लेने में दिक्कत पैदा करता है. अधिकारियों का ये भी कहना है कि बॉन्ग्क्रेकिक एसिड के ज़हर का नतीजा अक्सर घातक होता है.


गौ फी (Gao Fei) हेइलोंगजियांग प्रांत के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के खाद्य सुरक्षा निदेशक हैं. उनका कहना है,


“ये एसिड इंसान के शरीर के कई ऑर्गन्स को खतरनाक नुकसान पहुंचा सकता है. इन ऑर्गन्स में लिवर, किडनी, दिल और दिमाग शामिल हैं.”


एक्सपर्ट्स की मानें तो अभी तक इस एसिड का कोई एंटीडोट मौजूद नहीं है. अगर इसका ज़हर किसी के शरीर में पहुंचता है, तो मौत की संभावना 40 से 100 फीसदी तक हो जाती है. ऐसा खाना, जिसमें बॉन्ग्क्रेकिक एसिड मौजूद हो, उसका सेवन करने के कुछ ही घंटों बाद इसका असर दिखने लगता है. पेट में दर्द होता है, पसीना आता है, कमज़ोरी लगती है और आखिर में इंसान कोमा में चला जाता है. ये सब 24 घंटे के अंदर हो जाता है.

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