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पायलट के गुस्से ने प्लेन गिरवाया plane accident

1998 जब पायलट के गुस्से ने प्लेन गिरवाया और 203 लोग मर गए थे 

plane accident


1998 की दुर्घटना की दो दर्दनाक तस्वीरें.

दो हादसे. दोनों को जोड़ती, तारीख़…

आज 16 फरवरी है. और इस तारीख़ का ताल्लुक़ है, दो विमान हादसों से.


16 फ़रवरी, 1986. रविवार. एक ‘बोईंग 737’ विमान ने ताइवान की राजधानी ताईपेई के सोंगशान एयरपोर्ट से उड़ान भरी. शाम के 6 बजकर 09 मिनट पर. ये विमान ताइवान के मंगोंग शहर के एक छोटे से ‘पेंघु’ नाम के एयरपोर्ट जा रहा था. विमान, ‘चाइना एयरलाइंस’ का था. फ़्लाइट नम्बर 2265. विमान में कुल 13 लोग सवार थे. जिसमें से सिर्फ़ 6 यात्री थे और बाकी 7 पायलट और क्रू मेंबर्स. जब विमान ने टेक ऑफ़ के क़रीब एक घंटे बाद, शाम के 7 बजकर 05 मिनट पर लैंड होने का प्रयास किया तो चालक दल को विमान के सामने वाले हिस्से में एक ज़ोरदार वाइब्रेशन महसूस हुआ. पायलटों ने तुरंत ‘गो-अराउंड’ करना चाहा.


आसान भाषा में कहें तो ‘गो-अराउंड’ मतलब, लैंड होते-होते या होने से ऐन पहले फ़्लाइट को फिर से टेक ऑफ़ करवाना. ये ‘गो-अराउंड’ आमतौर पर किसी हादसे को टालने का एक आपातकालीन प्रयास होता है.


लेकिन फ़्लाइट 2265 के लिए यही ‘गो-अराउंड’ जानलेवा साबित हुआ. विमान हवाई अड्डे से तो दूर निकल गया लेकिन मैगोंग शहर के पास प्रशांत महासागर के तट से टकरा गया. सभी 13 लोगों की मौत हो गई.


गो अराउंड को लेकर पब्लिक डोमेन में उपलब्ध तस्वीर.

ये हादसा हमारी मेन स्टोरी का एक सब प्लॉट था. मेन स्टोरी पर जाने से पहले ‘वर्ल्ड साइंस फ़ेस्टिवल’ में डिस्कस किए जाने वाले एक फ़ैक्ट से आपको रूबरू करवा दें. इसके अनुसार, किसी व्यक्ति की किसी फ़्लाइट दुर्घटना में मारे जाने की संभावना उससे कहीं कम है, जितनी घर से एयरपोर्ट पहुंचने के दौरान किसी सड़क हादसे में मारे जाने की. और ये कोई नया फ़ैक्ट नहीं है. एक पुरानी मूवी में सुपरमैन ने भी कहा था कि ‘हवाई यात्राएं दुनिया की सबसे सुरक्षित यात्राएं हैं.’


इसलिए ये किसी आदमी पर दो बार बिजली गिरने जैसा ही एक दुर्योग था कि इस 1986 की घटना के ठीक 12 साल बाद उसी तारीख़ को एक और विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ. उसी चाइना एयरलाइंस का. क़रीब-क़रीब उसी तरह से जैसे पिछला हुआ था.

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16 फ़रवरी 1998. सोमवार…

एक ‘एयरबस A300’ ने इंडोनेशिया के बाली शहर से उड़ान भरी. स्थानीय समयानुसार, दोपहर के 03 बजकर 27 मिनट पर. ये एक इंटरनेशनल फ़्लाइट थी. ताइवान के ताओयुवान शहर के लिए. फ़्लाइट नम्बर 676. विमान में सवार थे, कुल 196 लोग, जिसमें से 182 यात्री और 14 क्रू मेंबर्स थे.


चाइना एयरलाइंस 1994 आते-आते काफ़ी कुख्यात हो चली थी.

हालांकि इस 1998 वाले हादसे में उससे ज़्यादा लोग मारे गए थे, जितने विमान में सवार थे. कितने और क्यूं आगे बताएंगे. उससे पहले एक मिनट के लिए थोड़ा पीछे चलते हैं. जब क़रीब चार साल पहले, 1994 तक, चाइना एयरलाइंस की इमेज बहुत ख़राब थी. साल 1985, 1986, 1991 और 1992 में इस एयरलाइन के कई विमान छोटे-बड़े हादसों का शिकार हो चुके थे. और ताबूत में आख़िरी कील गाड़ी थी एक और विमान हादसे ने. चाइना एयरलाइन्स की फ़्लाइट 140, 26 अप्रैल, 1994 को दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी. इस विमान में सवार 271 लोगों में से सिर्फ़ 7 लोग बच पाए थे. इस दुर्घटना के बाद चाइना एयरलाइंस का लगभग पूरा टॉप मैनजमेंट रिज़ाइन कर गया. चाइना एयरलाइंस की स्थिति और इमेज सुधारने के लिए देश-विदेश से एक्सपर्ट्स बुलाए गए. ये मूव सफल लग रहा था. कम से कम 1998 तक. इन चार सालों में चाइना एयरलाइंस का कोई भी विमान, किसी भी दुर्घटना में शामिल नहीं हुआ.


लेकिन, फिर 1998 में चाइना एयरलाइंस की साख में फिर बट्टा लग गया था…

16 फ़रवरी, 1998 को बाली से उड़ा ये विमान जब ताओयुवान शहर के चियांग काई-शेक एयरपोर्ट पर लैंड करने जा रहा था तो रात गहराने लगी थी. मौसम भी ख़राब हो गया था. गहरे कुहासे के चलते विजेबिलटी 1,300 मीटर रह गई थी. लेकिन इससे बुरी बात ये थी कि विजेबिलटी और ख़राब होते जा रही थी. इसके चलते कैप्टन कॉन्ग लॉन्ग-लिन ज़ल्द से ज़ल्द विमान को लैंड करवा देना चाह रहे थे.

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कैप्टन कॉन्ग लॉन्ग-लिन को एयरबस उड़ाने का 2,300 से ज़्यादा घंटों का अनुभव था. लेकिन उनके को-पायलट यानी फ़र्स्ट ऑफ़िसर जियांग अपेक्षाकृत अनुभवहीन थे.


चाइना एयरलाइंस की फ़्लाइट 676, घनी आबादी वाले क्षेत्र में क्रैश हुई थी.

शाम के 7 बजकर 35 मिनट पर फ़र्स्ट ऑफ़िसर जियांग ने बाक़ी क्रू सदस्यों को बताया कि हम अगले सात मिनट पर नीचे उतरना शुरू करेंगे. लेकिन इस घोषणा के अगले दस मिनट तक कैप्टन कॉन्ग ने, जियांग से नीचे उतरने के बारे में बात नहीं की. इसके चलते, अब विमान को उसी ऊंचाई से उतरने के लिए कम दूरी या कम समय मिलना था.


इसके बाद की कॉकपिट की रिकॉर्डिंग से पता चलता है कि कैप्टन और अनुभवहीन फ़र्स्ट ऑफ़िसर जियांग के बीच बहुत ही तीखी बातचीत हुई थी. जहां कैप्टन, जियांग को लगभग डांटते हुए आदेश दे रहे थे और बुरी तरह से सहमा हुआ जियांग एक शुरुआती गड़बड़ कर चुकने के चलते अपना पूरा आत्मविश्वास खो चुका था, वहीं कैप्टन को सिर्फ़ एक बात की ज़ल्दी थी, लैंड करने की. इसी चक्कर में उनसे SOP का भी उल्लंघन किया था, उसने ग्राउंड स्टाफ़ के साथ ख़ुद बात की थी, जबकि ऐसा फ़र्स्ट ऑफ़िसर जियांग द्वारा किया जाना चाहिए था.


SOP मतलब स्टेंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीज़र. मतलब जिस हिसाब से हमेशा काम होता है और और होते रहना चाहिए. और जो हिसाब हज़ारों अच्छे-बुरे अनुभवों के बाद एक नियम बन चुका है.


तो सार ये कि, ऐन उस वक्त जब सबसे ज़्यादा ज़रूरत कोऑर्डिनेशन की थी, वही नदारद था. आठ बजे विमान को रनवे से सिर्फ़ 4,000 फ़ीट ऊपर होना था लेकिन अभी वो 7,000 फ़ीट ऊपर था. इस वक़्त सबसे अच्छा विकल्प ‘गो-अराउंड’ करके दोबारा लैंड करने का प्रयास था.

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चाइना एयरलाइंस के 1992 में दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान के बाद मृतकों के शोकाकुल परिजन.

कुछ देर बार कैप्टन ने कहा भी-


अरे हम कुछ ज़्यादा ही ऊपर हैं. लेकिन कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. नीचे उतरते रहो.


बहरहाल काफ़ी क़ीमती वक्त बीता देने के बाद जब कैप्टन को एहसास हुआ कि सही लैंडिंग ही हिसाब से हाइट काफ़ी ज़्यादा है तो उसने ‘गो अराउंड’ का आदेश दे दिया. और प्लेन में मौजूद ‘गो अराउंड’ वाले स्विच ऑन कर दिए. ‘गो अराउंड’ ऑन करने के साथ ही ऑटो पायलट को भी अपने आप एक्टिव हो जाना था.


‘ऑटो पायलट’ ऐसा समझ लीजिए कि पायलट के न होने की दशा में भी प्लेन काफ़ी हद तक ख़ुद-ब-ख़ुद उड़ लेता या, इस ‘गो अराउंड’. के दौरान उससे जुड़े कई टास्क ख़ुद-ब-ख़ुद कर लेता.


लेकिन हुआ क्या कि ‘गो अराउंड’ तो ऑन हो गया पर पायलट ने अनजाने में विमान के ऑटो पायलट को ‘गो अराउंड’ के 6 सेकेंड पहले ही डिसइंगेज कर दिया था. मतलब एक तरह से डिसेबल या बंद कर दिया था. लेकिन उसे ख़ुद इसके बारे में पता या याद नहीं था. यानी विमान अब कैप्टन को उड़ाना था लेकिन वो ‘ऑटो पायलट’ के भरोसे था. और इस दौरान वो अपने को-पायलट जियांग को हड़काने में लगा हुआ था. यूं 11 क़ीमती सेकेंड बीत जाने के बाद प्लेन वॉर्निंग देने लगा कि वो क्रैश होने वाला है.


कॉकपिट में चल रही बातचीत की ट्रांसस्क्रिप्ट के दो महत्वपूर्ण हिस्से. जिनसे पता लगता है कि पायलट और को-पायलट के बीच कुछ भी अच्छा नहीं चल रहा था.

आठ बजकर पांच मिनट सत्तावन सेकेंड पर फ़्लाइट 676 क्रैश हो गई. सभी 196 सवार मारे गए. इसके अलावा ये विमान जहां गिरा वो आबादी क्षेत्र था. विमान एक फ़ोर लेन रोड पर घिसटता चला गया. उसके बाद शहर की इमारतों से सीधे नाक के बल टकराया. विमान में ज़ोर का धमाका हुआ और उसमें आग लग गई. ग्राउंड में भी सात लोग मारे गए. यूं मरने वालों की कुल संख्या 203 पहुंच गई.


दो साल चली जांच के बाद पाया गया कि विमान हादसे में पूरी ग़लती पायलट की थी. चाइना एयरलाइंस के प्रशिक्षण कार्यक्रम की जांच करने वाले जांचकर्ताओं ने बाद में ये भी लिखा कि 1994 की दुर्घटना से एयरलाइंस ने कुछ नहीं सीखा. तो ये था आज का तारीख़. विमान हादसों से भरा. उम्मीद है अगली बार तारीख़ में मिलेंगें तो कुछ अच्छे मोमेंट्स को लेकर.

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