कुंभ में बिछड़ी महिला 5 साल बाद कुंभ में ही मिली latest hindi news

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 फिल्मी कहानी सच हो गई, कुंभ में बिछड़ी महिला 5 साल बाद कुंभ में ही मिली


फिल्मी कहानी सच हो गई, कुंभ में बिछड़ी महिला 5 साल बाद कुंभ में ही मिली

यूपी के सिद्धार्थ नगर की रहने वाली कृष्णा देवी 5 साल पहले अर्धकुंभ में खो गई थीं. अब जाकर पुलिस ने परिवार से मिलवाया.



बॉलिवुडिया फिल्मों में लोगों के कुंभ मेले में बिछड़ने और मिलने का फॉर्म्यूला पुराना है, लेकिन इस बार यह असल में साबित हुआ है. मामला हरिद्वार में चल रहे कुंभ का है. एक महिला 2016 में हरिद्वार में ही हुए अर्धकुम्भ में अपने परिवार से बिछड़ गयी थी. बुधवार 7 अप्रैल को महाकुंभ के दौरान ही वह अपने परिजनों से मिली. महिला को उसके परिवारवालों से पुलिस ने मिलवाया.


साल 2016 में खोईं, 2021 में मिलीं

उत्तराखंड पुलिस कुंभ मेले में सेफ्टी को देखते हुए वेरिफिकेशन की मुहिम चला रही है. इस दौरान कुंभ नगरी और आसपास रहने वालों के पते-ठिकाने वेरिफाई किए जा रहे हैं. आजतक संवाददाता के मुताबिक, जनवरी 2021 में ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर कृष्णा देवी नाम की एक महिला मिली. वह पांच साल से त्रिवेणी घाट पर रह रही थीं. कृष्णा देवी ने अपने को यूपी के सिद्धार्थ नगर का निवासी बताया. घर का पता भी बताया.


उत्तराखंड पुलिस ने वेरिफिकेशन के लिए कृष्णा देवी का फोटो और डिटेल्स सिद्धार्थ नगर पुलिस को भेजीं. सिद्धार्थ नगर पुलिस ने जांच की. महिला के परिवारवालों से संपर्क किया. पता चला कि कृष्णा देवी 2016 में हरिद्वार के अर्धकुंभ में स्नान करने के लिए घर से निकली थीं. लेकिन वापस नहीं लौटीं. परिवारवालों ने हरिद्वार, अयोध्या, बनारस, इलाहाबाद में खोजा. अपने रिश्तेदारों के यहां भी पूछताछ की. अखबारों और टीवी पर भी गुमशुदगी का विज्ञापन दिया, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला.


फिर आया खुशी का दिन

परिवार ने इस सबके अलावा सिद्धार्थ नगर के थाना जोगिया उदयपुर में कृष्णा देवी की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई. आखिर में परिवार ने थक-हारकर कृष्णा देवी के मिलने की उम्मीद छोड़ दी. लेकिन फिर वही हुआ, जो फिल्मों में होता है. थाना सिद्धार्थ नगर से वेरिफिकेशन रिपोर्ट आने के बाद कृष्णा देवी के बेटे दिनेश्वर पाठक से पुलिस ने संपर्क किया. बताया कि उनकी मां सही सलामत ऋषिकेश में रह रही हैं.


खबर मिलते ही परिवार वाले हैरान रह गए. सभी की खुशी का ठिकाना न रहा. महिला के परिजन उन्हें लेने ऋषिकेश पहुंचे. पुलिस की मौजूदगी में जब कृष्णा देवी अपने परिजनों से मिलीं तो आँखें भर आईं. कृष्णा देवी ने परिवार को बताया कि परिवार से दूर रहने के दौरान उन्होंने हरिद्वार, अयोध्या, मथुरा, वृदावन, गंगोत्री, यमुनोत्री, बदरीनाथ, केदारनाथ आदि की यात्राएं भी कीं.


अमेरिकी धमकी के बाद भी भारत रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम क्यों खरीद रहा?

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ पीएम नरेंद्र मोदी.

साल 2018. अक्टूबर महीने की 04 और 05 तारीख़. नई दिल्ली में भारत और रूस की सालाना मीटिंग का आयोजन हुआ. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इसमें हिस्सा लेने आए थे. उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाक़ात की. इस मुलाक़ात के दौरान दोनों देशों ने एक ख़ास डील पर दस्तख़त किया. इस डील की क़ीमत लगभग 40 हज़ार करोड़ रुपये थी. भारत ने सतह से हवा में मार करने वाले पांच S-400 मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम की खरीदारी को हरी झंडी दिखाई थी.

modi with putin


भारत लंबे समय से रूस से ये मिसाइल खरीदने के बारे में सोच रहा था. पहले S-400 मिसाइल की 12 यूनिट हासिल करने का प्लान था. बाद में सरकार ने पांच यूनिट पर सहमति दे दी. 2016 के ब्रिक्स सम्मेलन में भारत और रूस ने औपचारिक समझौता किया. और, 2018 में पुतिन और मोदी की मौज़ूदगी में इस समझौते पर अंतिम मुहर लग गई.


इस डील से पड़ोसी देशों के पेट में मरोड़ उठा. चीन और पाकिस्तान के लिए ये चेतावनी की तरह था. इस डील पर सबसे ज़्यादा बखेड़ा खड़ा किया अमेरिका ने. उसने भारत पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दे दी. अब सवाल उठता है कि न तो अमेरिका की सीधी सीमा भारत से जुड़ती है और न ही दोनों देश आपस में युद्ध कर रहे थे. फिर इस नाराज़गी की वजह क्या थी? S-400 मिसाइड डील का तिया-पांचा क्या है? इसके पूरा होने से भारत के बाकी देशों से संबंधों पर क्या असर पड़ेगा? और सबसे ज़रूरी बात, ढाई साल बाद ये डील फिर से चर्चा में क्यों है? सब विस्तार से बताएंगे.


कुछ बेसिक बातें जान लीजिए-


– ये सतह-से-हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम है. मान लीजिए कि किसी दुश्मन ने हमारे ऊपर फ़ाइटर जेट, मिसाइल या ड्रोन से हमला किया तो S-400 उसको नेस्तनाबूद कर सकता है. यानी वो उसको हवा में ही तबाह कर सकता है.

– बेसिकली, ये एक डिफ़ेंस सिस्टम है. यानी हवाई आक्रमण से सुरक्षा करता है. S-400 की रेंज़ है 400 किलोमीटर और ये 30 किलोमीटर की ऊंचाई तक लक्ष्य को भेद सकता है.

– S-400 को बनाया है रूसी कंपनी ‘अल्माज़-एंते’ ने. ये मिसाइल सिस्टम 2007 से काम में है. सबसे पहले इसे मॉस्को में तैनात किया गया था.

– आदेश मिलने पर S-400 को पांच से 10 मिनट के अंदर तैनात किया जा सकता है.


S 400

S-400 सतह-से-हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम है

भारत के S-400 लेने से अमेरिका क्यों नाराज़ है?


डिफ़ेंस एक्सपर्ट्स की मानें तो ये अब तक का सबसे उन्नत एयर डिफ़ेंस सिस्टम है. इससे बेहतर अभी तक बना नहीं. अमेरिका के पास सबसे बेहतर फ़ाइटर जेट है, F-35. ये रडार को चकमा देने में माहिर है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, F-35 रडार पर मच्छर के आकार का दिखता है. इसे ट्रैक करना काफ़ी मुश्किल है. हालांकि, S-400 मिसाइल सिस्टम इसके टक्कर का है. अभी तक दोनों का आमना-सामना नहीं हुआ है. लेकिन ये मिसाइल सिस्टम F-35 के हमले को बेकार कर सकता है. डिफ़ेंस एक्सपर्ट्स ऐसा अनुमान लगाते हैं. इन्हीं दावों से अमेरिका की चिंताएं बढ़ी हुई हैं.


अमेरिका के नाराज़ होने की एक और बड़ी वजह है. भारत ने यूएस में बने एयर डिफ़ेंस सिस्टम ‘पैट्रियट पीएसी-3’ को दरकिनार कर रूस को तरजीह दी. इससे अमेरिका को दो झटके लगे. एक तो उसके हाथों से बड़ी डील निकल गई. दूसरा ये हुआ कि उसके दुश्मन देश रूस से भारत की नज़दीकियां बढ़ी. ये अमेरिका के लिए खतरा था. उसे लगा, दक्षिण एशिया में उसका प्रभाव कम पड़ जाएगा.


इस संभावित खतरे से निपटने का रास्ता अमेरिका ने पहले ही तैयार कर रखा है. जुलाई 2017 में अमेरिकी संसद ने एक कानून पास किया. काउंटरिंग अमेरिकाज़ एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन्स ऐक्ट (CAATSA ‘काट्सा’). इस कानून में तीन देशों पर प्रतिबंध लगाए गए. रूस, ईरान और नॉर्थ कोरिया.


इसमें प्रावधान है कि अगर किसी देश ने रूस से मिलिटरी के साजो-सामान खरीदे तो अमेरिका उस देश पर प्रतिबंध लगा सकता है. कैसे प्रतिबंध? ज़रूरी सामान के आयात-निर्यात पर. कोई आर्थिक मदद मिल रही हो तो उस पर. इसका दायरा तय नहीं है. लेकिन अमेरिका अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है.


रूस को काट्सा ऐक्ट में क्यों लाया गया था?


जो तीन वजहें अमेरिकी सरकार ने बताईं, उनमें से एक है यूक्रेन का मसला. रूस ने सेना भेजकर क्रीमिया को अपना हिस्सा घोषित कर दिया था. इसके अलावा, रूस यूक्रेन के पूर्वी इलाके में लड़ रहे विद्रोहियों को भी सपोर्ट करता है. अमेरिका, क्रीमिया को यूक्रेन का हिस्सा मानता है. वो रूस के कब्ज़े को अवैध बताता है. उसने विद्रोहियों को सपोर्ट करने के लिए रूस की आलोचना भी की है.


दूसरी वजह थी, 2016 के प्रेसिडेंशियल इलेक्शन में छेड़छाड. खुफिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि रूसी हैकर्स ने राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित किया था. रूस ने सोशल मीडिया कैंपेन्स के जरिए भी चुनाव पर गहरा असर डाला था. कहा गया कि पुतिन को इस बारे में पूरी जानकारी थी. इसी तरह के आरोप 2020 के अमेरिकी चुनाव में भी सामने आए. जो बाइडन ने राष्ट्रपति बनते ही पुतिन को फ़ोन किया और धमकी दी कि आरोप सच साबित हुए तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.


तीसरी वजह थी, सीरिया में बशर अल-असद का सहयोग. रूस, सीरिया में असद सरकार को सपोर्ट करता है और विद्रोहियों के ख़िलाफ़ हमले करता रहता है. अमेरिका का आरोप है कि रूस आम नागरिकों को निशाना बनाता है और उनपर केमिकल अटैक्स भी करता है. रूस ने सीरिया में भी S-400 मिसाइल सिस्टम तैनात कर रखा है.


यह ऐक्ट कितना असरदार रहा?


ये तो हुई गिनाई हुई वजहें. एक्सपर्ट्स की मानें तो अमेरिका, रूस के बढ़ते प्रभाव से परेशान है. वो अपनी मोनोपॉली बनाए रखना चाहता है. काट्सा ऐक्ट उसी चाह का परिणाम है. खैर, ऐक्ट पास हो गया. ये अब तक कितना असरदार रहा है? ये दो उदाहरण से समझते हैं.


नंबर एक. साल 2015 में ईरान और अमेरिका के बीच न्युक्लियर डील हुई थी. जब ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बने, उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान इस डील का पालन नहीं कर रहा है. 2018 में उन्होंने डील से बाहर निकलने का फ़ैसला किया. ईरान, भारत में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक था. अमेरिका ने भारत से कहा, तेल का आयात रोको वर्ना प्रतिबंध लगा देंगे. मई 2019 में भारत को ईरान से कच्चा तेल लेना बंद करना पड़ा.


अब अमेरिका में जो बाइडन राष्ट्रपति हैं. माना जा रहा था कि ईरान के साथ न्युक्लियर डील में वापसी उनकी पहली प्राथमिकता होगी. अभी तक बाइडन पुरानी सरकार के ढर्रे पर ही चल रहे हैं.


Joe Biden

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन. 

नंबर दो. तुर्की नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइज़ेशन (नाटो) का हिस्सा है. NATO की स्थापना अप्रैल 1949 में हुई थी. कोल्ड वॉर के दौर में अमेरिका की पहल पर. इस हिसाब से तुर्की, अमेरिका का डिफ़ेंस पार्टनर है. तुर्की को F-35 प्रोग्राम में भी शामिल किया गया था. जैसे ही तुर्की ने रूस से S-400 खरीदा, अमेरिका ने तुरंत तुर्की पर प्रतिबंध लगा दिया. अप्रैल 2021 में उसने तुर्की के सीनियर अधिकारियों के वीजा समेत कुछ संस्थानों पर भी प्रतिबंध लगाया गया. इसी तरह के सैंक्शन चीन पर भी लगाए गए हैं. अमेरिका इन प्रतिबंधों का दायरा बढ़ा रहा है. उसका कहना है कि रूस से S-400 की डील खत्म करो. तुर्की ने ऐसा करने से इनकार कर दिया है.


आज हम इन सबकी चर्चा क्यों कर रहे हैं?


वजह है, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की भारत यात्रा. लावरोव 06 अप्रैल को भारत आए. इस दौरान उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाक़ात की. मीटिंग के बाद लावरोव ने कहा कि भारत S-400 मिसाइल डील पर कायम है. भारत ने रूस से ये खरीदारी इस शर्त पर की थी कि रूस, पाकिस्तान को S-400 नहीं देगा. रूस इसके लिए राज़ी है.


भारत की एक मिलिटरी टीम फिलहाल मॉस्को में है. ये टीम S-400 चलाने की ट्रेनिंग के लिए गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के पास पूरी खेप अक्टूबर 2021 तक पहुंच जाएगी.


रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर.

ये अमेरिका के लिए झटके की तरह देखा जा रहा है. पिछले हफ़्ते अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन भारत आए थे. इस दौरान उन्होंने रूस के साथ मिसाइल डील का मसला उठाया था. उन्होंने प्रतिबंध लगाने की चेतावनी भी दी थी. कहा था कि भारत S-400 की डिलिवरी लेने से मना कर दे. इसके बावजूद भारत ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे हैं. भारत बार-बार कहता रहा है कि रूस के साथ हुई डील काट्सा ऐक्ट के लागू होने से पहले हो चुकी थी.


लावरोव ने और क्या-क्या कहा?


– उन्होंने बताया कि रूस, भारत में अत्याधुनिक हथियार बनाने के प्लान पर विचार कर रहा है. ये निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ प्रोग्राम के तहत किया जाएगा.

– लावरोव ने कहा कि रूस और चीन के संबंध सबसे बेहतर दौर में हैं. हालांकि, दोनों देश कोई मिलिटरी अलायंस बनाने नहीं जा रहे हैं. रूस ने पिछले साल भारत और चीन के बीच बढ़ रहे तनाव को कम करने में अहम भूमिका निभाई थी.


दोनों विदेश मंत्रियों की बातचीत में इस साल होने वाली सालाना मीटिंग पर भी चर्चा हुई. भारत और रूस के शीर्ष नेता इस मीटिंग में हिस्सा लेते हैं. पिछले साल कोरोना की वजह से इसे रद्द करना पड़ा था. इस साल मीटिंग कब होगी, ये अभी तय नहीं है. हालांकि, इतना तय है कि इसमें भारत और रूस के बीच डिफ़ेंस पार्टनरशिप पर बड़ा फ़ैसला लिया जा सकता है.


दोनों नेताओं के बीच कोरोना वैक्सीन को लेकर भी चर्चा हुई. भारत स्पूतनिक वैक्सीन की 7 करोड़ डोज बना रहा है. लावरोव ने भारत के साथ इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया.


इस मुलाक़ात का एक और बड़ा मुद्दा रहा, अफ़ग़ानिस्तान में शांति के लिए चल रहा प्रयास. पिछले महीने रूस ने तालिबान और अफ़ग़ान सरकार के बीच बातचीत की मेज़बानी की थी. इसमें अमेरिका, चीन और पाकिस्तान को बुलाया गया, लेकिन भारत को इसमें शामिल नहीं किया गया था. भारत ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान से उसके साझा हित जुड़े हैं. सभी पक्षों को शामिल किए बिना शांतिपूर्ण नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता.


पाकिस्तान क्या लेने गए सर्गेई लावरो?


सर्गेई लावरोव भारत के बाद सीधे पाकिस्तान पहुंचे हैं. दो दिनों की यात्रा पर. इस दौरान वो पाकिस्तान के पीएम इमरान ख़ान और चीफ़ ऑफ़ आर्मी स्टाफ़ क़मर जावेद बाजवा से भी मिलेंगे. 2012 के बाद किसी रूसी विदेश मंत्री की ये पहली पाकिस्तान यात्रा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस विजिट में अफ़ग़ानिस्तान का मुद्दा सबसे ऊपर रहेगा.


पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव. 

आसार ये भी हैं कि पाकिस्तान, रूस के साथ जम्मू-कश्मीर का मुद्दा भी उठा सकता है. पिछले कुछ दिनों में भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार को लेकर बात आगे बढ़ी थी. फिर पाकिस्तानी कैबिनेट ने प्रस्ताव खारिज कर दिया था. पाकिस्तान का कहना है कि जब तक जम्मू-कश्मीर में 05 अगस्त 2019 से पहले वाली स्थिति नहीं लौटती, भारत के साथ व्यापार नहीं होगा.


पाकिस्तान और रूस डिफ़ेंस पार्टनरशिप समेत कई और ज़रूरी मुद्दों पर भी चर्चा कर सकते हैं. भारत इस विजिट पर नज़र बनाए हुए है. नज़र हमारी भी रहेगी. हम इससे जुड़ी अपडेट्स आप तक पहुंचाते रहेंगे.

कुंभ में बिछड़ी महिला 5 साल बाद कुंभ में ही मिली latest hindi news कुंभ में बिछड़ी महिला 5 साल बाद कुंभ में ही मिली latest hindi news Reviewed by alok kumar on Thursday, April 08, 2021 Rating: 5

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