कोरोना से हुई मौतों पर झूठ कौन बोल रहा है? श्मशान या सरकारी दावे?news/covid-19

कोरोना से जुड़ी ये तस्वीरें 6 राज्यों की कहानी बयां कर रही हैं

 कहते हैं दिल्ली न केवल भारत की राजधानी है, बल्कि देश की शान भी है. ये देश की सत्ता का केंद्र है. तरक्की की आहट सबसे पहले यहां सुनाई पड़ती है. दिल्ली से दूर-दराज़ के इलाक़े में भी अगर कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ता है, तो ज़िंदगी बचाने के लिए दिल्ली का रुख़ करता है. लेकिन उम्मीदों वाली वही दिल्ली आज ख़ुद लाचार नज़र आ रही है. कोरोना के ज़हर से तड़पते तमाम मरीज़ों को न तो बेड मिल पा रहा है और न समय पर ऑक्सीजन. कई मरीज़ों के परिजन तो दवाओं के लिए भी जगह-जगह भटक रहे हैं. और जब दिल्ली का ये हाल है, तो बाक़ी देश के हालात की बस कल्पना की जा सकती है.

कोरोना से हुई मौतों पर झूठ कौन बोल रहा है? श्मशान या सरकारी दावे?

कोरोना से हुई मौतों पर झूठ कौन बोल रहा है? श्मशान या सरकारी दावे?


दिल्ली की ये तस्वीर डरा देने के लिए काफी है.

कोरोना की दूसरी लहर इतनी खतरनाक होगी, किसी ने नहीं सोचा था. इसके सामने सारे मेडिकल इंतजाम फेल हो गए, सिस्टम फेल हो गए, और फेल हो गया हर सरकारी दावा. हर शहर के श्मशानों में लगातार लाशें आ रही हैं, बिना रुके चिताएं जल रही हैं. ऐसा लगता है जैसे श्मशान, कारखाने बन गए हैं जो 24 घंटे चल रहे हैं. ऐसी त्रासदी आजादी के बाद से देश ने कभी नहीं देखी. सरकारी आंकड़े चाहे जो कहते हों लेकिन श्मशान और कब्रिस्तान झूठ नहीं बोलते.


विदेशी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ लिखता है कि भारत के अस्पताल भरे हुए हैं, ऑक्सीजन की कमी है, लोग डॉक्टरों को दिखाने के लिए इंतजार में मर रहे हैं, ये तमाम बातें दिखाती हैं कि मौत का असली आंकड़ा, सरकारी आंकड़ों से काफी अधिक है. सरकारी आंकड़ों की बात करें तो 24 अप्रैल को पूरे देश में कोरोना वायरस से 2767 लोगों की मौत हुई. जबकि देशभर के श्मशानों से आ रही तस्वीरें अलग ही कहानी बता रही हैं.


देशभर के श्मशान घाटों से जो इंटरव्यू आ रहे हैं वो बताते हैं कि यहां आग शांत नहीं हो रही. लगातार चल रही लाशों की तस्वीरें बताती हैं कि मौत का असली आंकड़ा सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक है.  यूनिवर्सिटी ऑफ मिशीगन के महामारी विशेषज्ञ, भ्रमर मुखर्जी कहते हैं कि ‘ये पूरी तरह से गलत डेटा है. अभी तक की रिपोर्ट्स और जानकारी के मुताबिक मौत का जो आंकड़ा बताया जा रहा है, ये उसे दोगुने से लेकर पांच गुना तक हो सकता है.’


गुजरात के अहमदाबाद एक बड़ा श्मशान है. यहां के कर्मचारी सुरेश भाई बताते हैं कि इस श्मशान में 24 घंटे चिताएं जल रही हैं. सुरेश भाई कहते हैं कि उन्होंने मौत की ऐसी अंतहीन स्थिति नहीं देखी है. लेकिन जब वो पीड़ित परिवारों को पर्ची देते हैं तो उस पर मौत की वजह कोविड-19 नहीं लिखते, बावजूद इसके कि मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. वो पर्ची पर वजह लिखते हैं- बीमारी. जब उनसे पूछा गया कि ऐसा क्यों? तो उन्होंने कहा कि ऊपर से यही कहा गया है. और इस मुद्दे पर प्रशासन के जिम्मेदार लोग बात करने से इनकार कर देते हैं.


कई जगहों पर सामूहिक अंतिम संस्कार हो रहे हैं. कई जगहों पर एक साथ दर्जनों चिताएं जल रही हैं.


कुछ दिन पहले हमारी साथी स्वाति लखनऊ पहुंची थीं. वहां उन्हें पता चला कि भैंसाकुंड श्मशान में अमूमन 20 शव रोजाना दाह-संस्कार के लिए आते थे लेकिन अब ये संख्या 100 हो चुकी है. कुछ लोगों का तो ये भी कहना है कि 12 से 24 घंटों तक अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. एक साथ जलती चिताओं की तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए तो प्रशासन ने एक किस्म की अस्थाई दीवार ही बना दी. वहां के हालात जानने के लिए आप ये वीडियो देख सकते हैं-


गुजरात के सूरत पहुंचे ‘दी लल्लनटॉप’ के संवाददाता निखिल, उस श्मशान में पहुंचे जहां से भट्टी की चिमनी पिघल जाने की खबर सामने आई थी. वहां मौजूद शख्स ने उन्हें बताया कि एक रात में 48 शवों का अंतिम संस्कार भी यहां हुआ है. पिछले कुछ दिनों से मृतकों की संख्या बढ़ गई है. लकड़ी से लेकर अन्य चीजों की मांग बढ़ गई है. कोरोना की इस दूसरी लहर से पहले मृतकों की संख्या इतनी नहीं थी लेकिन हालात अब काफी बुरे हैं. उनकी रिपोर्ट देखिए-


अब दोबारा से ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट पर आते हैं. अखबार लिखता है कि 80 के दशक में भोपाल में गैस लीक के कारण हजारों लोगों की जान गई थी. अब स्थानीय निवासी बता रहे हैं कि उस वक्त भी श्मशान इतने व्यस्त नहीं थे जितने आज हैं. कोविड के कारण अप्रैल के 13 दिनों में 41 मौतों का सरकारी आंकड़ा है. लेकिन इतने ही दिनों में भोपाल में करीब 1000 लोगों का अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल्स के तहत किया गया. भोपाल के एक कार्डियोलॉजिस्ट (दिल संबंधी बीमारियों के डॉक्टर) कहते हैं कि ‘बहुत सी मौतों को दर्ज नहीं किया जा रहा क्योंकि अधिकारी दशहत पैदा नहीं करना चाहते लेकिन मौतों का आंकड़ा दिनोंदिन बढ़ रहा है.’


अखबार के मुताबिक 14 अप्रैल को सूरत और गांधीनगर में करीब 124 लोगों के शव जलाए गए जबकि अधिकारियों के मुताबिक इस दिन पूरे प्रदेश में कोविड के कारण केवल 73 मौतें हुईं. यूपी के कानपुर में श्मशानों में जगह नहीं मिलने के कारण शहर के पार्कों में शवों को जलाए जाने की खबर मिली है.


ये स्थिति हर जगह है. सरकारी आंकड़ा बहुत कम है लेकिन अखबार, मीडिया की खबरों के मुताबिक, श्मशानों में कहीं अधिक लाशें कोविड प्रोटोकॉल्स के तहत जलाई गई हैं. भारत में बड़ी संख्या में जवान लोग रहते हैं, इसलिए माना जा रहा था कि कोविड यहां अपेक्षाकृत कम लोगों की जान ले रहा है लेकिन हाल ही में बढ़ रहे आंकड़े ने लोगों को चौंका दिया है. बता दें अभी तक 10 प्रतिशत से भी कम भारतीयों को कोविड वैक्सीन की एक डोज मिली है. बावजूद इसके कि भारत दुनिया का बड़ा वैक्सीन उत्पादक है. भारत को दुनिया का बहुत सारे गरीब देशों की मदद करनी थी लेकिन अंदरुनी हालात की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल निर्यात को बंद किया गया है.

तस्वीर गुजरात के अहमदाबाद की है. कोरोना से अपने परिजनों को खोने के बाद परिवार वाले अपने आंसू नहीं रोक पाए. 

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच जिस तरह की तस्वीरें अलग-अलग जगहों से आ रही हैं, वो परेशान करने वाली हैं. कई जगहों से हॉस्पिटल बेड्स, ऑक्सीजन और रेमडेसिविर दवा की कमी की खबरें आ रही हैं. सोशल मीडिया मदद मांगने वाली पोस्ट से भरा पड़ा है. कोरोना से अपनों को खो चुके लोग श्मशान घाट में लंबी-लंबी लाइनें लगा रहे हैं, ताकि शवों का अंतिम संस्कार करा सकें. उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. लेकिन इस बीच सरकारें कह रही हैं कि सबकुछ ठीक है. केंद्र सरकार का दावा है कि कोरोना संकट से निपटने के लिए किसी चीज की कमी नहीं है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन का कहना है कि सावधानी बरतने के साथ-साथ कोरोना से संक्रमित मरीजों और उनके सगे-संबंधियों को पॉजिटिव माहौल देने की जरूरत है. लेकिन जो तस्वीरें आ रही हैं, वो देखकर कैसे मान लें कि सब कुछ ठीक है.


क्या है बड़े राज्यों में कोरोना की स्थिति, इन तस्वीरों और आंकड़ों से जानिए.


महाराष्ट्र

# नए मामले-61,695

#ठीक हुए- 53,335

#मौत-349

#एक्टिव केस-6.20 लाख

#कुल मौतें-59,153



Mumbai

ये तस्वीर मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनल की है. कोरोना की वजह से राज्य में लगे कर्फ्यू के बाद प्रवासी अपने घरों की ओर लौट रहे हैं. स्टेशनों पर भीड़ देखी जा रही है. एक बीमार व्यक्ति को ट्रेन तक पहुंचाते परिवार के सदस्य.

महाराष्ट्र कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है. यहां एक तरह से मिनी लॉकडाउन लगा हुआ है. प्रवासी मजदूर एक बार फिर अपने घरों की ओर लौट रहे हैं. उद्धव सरकार ने कर्फ्यू के दौरान गरीबों की मदद और EMI की वसूली में राहत देने के लिए कोविड महामारी को प्राकृतिक आपदा घोषित करने की मांग की है. पीएम को लेटर लिखकर ऑक्सीजन के ट्रांसपोर्ट और रेमडेसिविर इंजेक्शन हवाई जहाज से भेजने का भी अनुरोध किया है.


छत्तीसगढ़

#नए केस-15,256

#ठीक हुए-9,643

#मौत-105

#एक्टिव केस-1.21 लाख

#कुल मौतें-5,442


Chhattisgarh

ये तस्वीर छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिला मुख्यालय से 25 किमी. दूर स्थित डोंगरगांव की है. ऑक्सीजन नहीं मिलने से कोरोना के चार मरीजों की मौत हो गई. नगर पंचायत के कचरा फेंकने वाले वाहन से इन शवों को श्मशान ले जाया गया.

कोरोना प्रभावित राज्यों में छत्तीसगढ़ दूसरे नंबर पर है. खराब होती स्थिति के बीच सरकार ने निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन वाले बिस्तरों का 50% कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व कर दिया है. सरकार ने राज्य में ESMA लागू कर दिया है. इसमें सरकारी, निजी स्वास्थ्य और चिकित्सकीय संस्थानों को शामिल किया है. इनसे जुड़े लोग विरोध प्रदर्शन या हड़ताल नहीं कर पाएंगे. लंबे लॉकडाउन की आशंका के चलते दिहाड़ी मजदूर और रेहड़ी-पटरी कारोबारी शहरों से गांवों की ओर पलायन कर रहे हैं. दूसरे प्रदेशों के रहने वाले अपने राज्यों में लौट रहे हैं.


गुजरात

#नए केस-8,152

#ठीक हुए-3,023

#मौत-81

#एक्टिव केस- 44,298

#कुल मौतें-5,076


Surat

तस्वीर गुजरात के सूरत की है. कोरोना की वजह से मरे लोगों के अस्थियों को हरिद्वार ले जाने की तैयारी की जा रही है.

गुजरात में सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि वह कोरोना से हुईं मौतों को कम दिखा रही है. सरकार ने मौत का जो आंकड़ा जारी किया है, वह सच्चाई से बिल्कुल अलग है. आज तक की संवाददाता ने छह घंटे में अहमदाबाद के सबसे बड़े कोविड अस्पताल से 50 से ज्यादा शवों को ले जाते हुए देखा. मजबूरी ऐसी कि एक ही शव वाहन में दो-दो शवों के ले जाने के लिए परिजन मजबूर दिखे. गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को व्यवस्था को लेकर फटकार लगाई है. और स्थिति सुधारने के लिए कहा है.


दिल्ली

#नए केस-16,699

#मौतें-112

#ठीक हुए-13,014

#एक्टिव केस- 54,309

#कुल मौतें-11,652


Corona Death

तस्वीर दिल्ली के एक अस्पताल के बाहर की है. अपने परिजन को खोने बाद रोता बिलखता परिवार.

दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने वीकेंड कर्फ्यू का ऐलान किया है. शुक्रवार रात 10 बजे से सोमवार सुबह 5 बजे तक वीकेंड कर्फ्यू रहेगा. दिल्ली में सभी शॉपिंग मॉल, जिम, स्पा, ऑडिटोरियम, असेंबली हॉल, एंटरनेटमेंट पार्क बंद रहेंगे. जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को ही बाहर निकलने की अनुमति होगी. सरकार ने दावा किया है कि अस्पतालों में बेड की कमी नहीं है. लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है. लेकिन जमीनी हकीकत सरकार के दावे से उलट दिख रही है.


मध्य प्रदेश

नए केस-10,166

मौतें-53

ठीक हुए-3,970

एक्टिव केस- 55,694

कुल मौतें-4,365


Bhopal (1)

तस्वीर भोपाल की है. PPE किट पहने परिवार के सदस्य हैं जो अपने परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए आए हैं.

मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में कोरोना के सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. हॉस्पिटल में ऑक्सीजन बेड की कमी और श्मशान में शवों के जलने की खबरें आ रही हैं. दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट बताती है कि यहां गुरुवार, 15 अप्रैल को 112 कोरोना संक्रमितों का अंतिम संस्कार हुआ. लेकिन सरकारी आंकड़ों में सिर्फ चार मौतें दर्ज हुईं. पांच दिनों में कोरोना से संक्रमित 356 लोगों का अंतिम संस्कार भोपाल में हुआ, लेकिन सरकारी आंकड़ों में इसकी संख्या सिर्फ 21 ही बताई गई.


उत्तर प्रदेश

नए केस- 22,439

मौतें- 104

ठीक हुए-4,222

एक्टिव केस-1,29,848

कुल मौतें-9,480


Lucknow4

तस्वीर लखनऊ के भैंसाकुंड की है. कोरोना से मरे लोगों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है.

उत्तर प्रदेश में रविवार को वीकेंड लॉकडाउन लगाने का फैसला लिया गया है. राज्य के कई शहरों से हॉस्पिटल बेड, ऑक्सीजन और रेमडेसिविर की कमी की खबरें आ रही थीं. सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि निजी हॉस्पिटल को कोविड हॉस्पिटल के रूप में परिवर्तित किया जाए. जरूरी मेडिकल सुविधाएं बढ़ाई जाएं, जिससे लोगों को दिक्कत ना हो. पहली बार बिना मास्क के पकड़े जाने पर 1000 रुपए जुर्माना लगेगा, वहीं दूसरी बार पकड़े जाने पर 10 हजार जुर्माना देना होगा.

कोरोना से हुई मौतों पर झूठ कौन बोल रहा है? श्मशान या सरकारी दावे?news/covid-19 कोरोना से हुई मौतों पर झूठ कौन बोल रहा है? श्मशान या सरकारी दावे?news/covid-19 Reviewed by alok kumar on Sunday, April 25, 2021 Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.