header ads

corona-doctors-medical-staff-warriors-tribute

 4 घंटे में 10 मरीजों की मौत, परिजनों का आरोप- अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म हो गई थी


दक्षिण भारत के कई राज्यों में ऑक्सीजन की कमी से मौतों की खबरें सामने आ रही हैं. हालांकि अधिकारी ऑक्सीजन की कमी होने से इनकार कर रहे हैं. 

hospital in corona time



तमिलनाडु के सरकारी अस्पताल में महज 4 घंटे के अंदर कोरोना के 10 मरीजों की जान चली गई. 4 मई की देर रात इन मरीजों ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया. मरीजों के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी की वजह से ये घटना हुई. हालांकि अधिकारी जिले में ऑक्सीजन के कमी होने से इनकार कर रहे हैं.


अस्पताल में भर्ती हैं 500 से ज्यादा मरीज

चेन्नई से सटे चेंगलपट्टू के सरकारी अस्पताल में 500 के करीब कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है. इनमें से बहुत से मरीजों को ऑक्सीजन की लगातार जरूरत है. इंडिया टुडे के प्रमोद माधव की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार यानी 4 मई की रात 4 घंटे के भीतर 10 मरीजों की जान चली गई. मरीज के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी थी, इस कारण मरीजों की मौत हुई.


घटना की खबर मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया. जिलाधिकारी और दूसरे बड़े अधिकारियों ने अस्पताल का दौरा किया. एक घंटे के अंदर ही अस्पताल में ऑक्सीजन का टैंकर पहुंच गया. अस्पताल में हुई मौत की वजह का पता लगाने के लिए जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि जिले में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं थी.


तमिलनाडु में कोरोना बना रहा रिकॉर्ड

तमिलनाडु का चेंगलपट्टू जिला कोरोना से बुरी तरह प्रभावित जिलों में से एक है. यहां हर दिन तकरीबन 1,500 नए पॉजिटिव मामले सामने आ रहे हैं. 4 मई को जिले में 1,608 नए कोरोना मरीज पाए गए. अगर पूरे तमिलनाडु की बात करें तो 4 मई को राज्य में 21,228 नए कोरोना केस मिले थे. ये एक दिन में आए अब तक के सबसे ज्यादा मामले रहे. इसमें अकेले राजधानी चेन्नई के 6,228 नए मामले शामिल हैं. इससे राज्य में कोरोना मरीजों का कुल आंकड़ा 12.49 लाख तक पहुंच गया. मंगलवार को बीते 24 घंटे के दौरान राज्य में 144 लोगों की मौत कोरोना संक्रमण के कारण होने की जानकारी दी गई.


आंध्र, कर्नाटक में भी 9 की मौत

ऑक्सीजन की कमी से मौत के आरोप सिर्फ तमिलनाडु में ही सामने नहीं आए. आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में भी ऑक्सीजन ऐसी घटनाओं की जानकारी मिली है. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, आंध्र में अनंतपुर के एक अस्पताल में चार मरीजों की जान चली गई. इसकी वजह भी ऑक्सीजन की कमी बताई गई. अनंतपुर में एक हफ्ते में इस तरह की ये तीसरी घटना है.


वहीं कर्नाटक के हुबली में भी 4 मई को एक अस्पताल में 5 कोरोना मरीजों ने दम तोड़ दिया. इनके परिजनों का आरोप है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण ऐसा हुआ. हालांकि जिला के चिकित्सा अधिकारी ने ऑक्सीजन की कमी होने से इनकार किया है.


 दिल्ली के जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की कमी से 25 मरीजों की मौत, MD ने क्या कहा?


हिमाचल प्रदेश के चंबा में बादल फटने से सड़कें बहीं, मलबे में गाड़ियां दबीं


हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में 4 मई को सुबह के वक्त अचानक बादल फट गया. लोगों के घरों में पानी घुस गया, सड़कें टूट गईं, फसलें बर्बाद हो गईं और वाहनों को भी बहुत नुकसान हुआ है. हालांकि इस घटना में किसी की जान नहीं गई. इससे पहले 3 मई को उत्तराखंड के उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग से भी बादल फटने की खबरें सामने आई थीं.


vans flowing in flood

आजतक की खबर के मुताबिक, करीब एक दर्जन से अधिक गांव बादल फटने की घटना से प्रभावित हुए हैं. विकास खंड महैला में बादल फटने से काफी नुकसान हुआ है. लोगों के घरों में पानी और मलबा घुस गया है. पानी के तेज बहाव के कारण सड़कें भी टूट चुकी हैं. ग्राम पंचायत पल्यूर में बादल फटने से जो मलबा आया, उसमें कई गाड़ियां दब गईं. रास्ते बंद होने के कारण प्रशासनिक अधिकारी भी बड़ी कठिनाई से गांव तक पहुंच पा रहे हैं.


स्थानीय किसानों ने बताया कि गेंहू की फसल को भारी नुकसान हुआ है. हाल ही में रोपी गई मक्का की फसल भी बर्बाद हो गई है. चंबा-भरमौर मार्ग भी बादल फटने के कारण अवरुद्ध हुआ है, जिसे खोलने में लोक निर्माण विभाग लगा हुआ है. ग्राम पंचायत प्ल्यूर के उप-प्रधान मनोज ने बताया कि फिलहाल ये आंकलन किया जा रहा है कि बादल फटने की इस घटना से कितना नुकसान हुआ है.


किलोड पंचायत के जिला परिषद सदस्य ललित ठाकुर ने बताया कि उन्होंने सरकार से किसानों की मदद के लिए गुहार लगाई है. एडीसी चंबा मुकेश रेपस्वाल ने बताया कि बारिश के कारण 3 पंचायतों में काफी नुकसान हुआ है. राहत की बात ये है कि किसी की जान इस हादसे में नहीं गई. उन्होंने कहा कि इस प्रकरण पर प्रशासन की नजर है और पीड़ितों की हर संभव मदद की जाएगी.


बादल फटने के कारण चंबा में लैंडस्लाइड भी हुआ है.

कब कहते हैं कि बादल फट पड़ा?

बादल फटना और बारिश दोनों में आसमान से पानी गिरता है. फर्क होता है पानी की मात्रा का, माने क्वांटिटी का. कंफ्यूज़न नहीं हो, इसलिए सयाने लोगों ने तय कर रखा है कि एक घंटे के अंदर 100 MM या उससे ज़्यादा पानी बरस जाए तो उसे बादल फटना या क्लाउड-बर्स्ट कहा जाए. 100 MM माने लगभग चार इंच.

बादल फटता कैसे है?

बादल में बहुत बड़ी-बड़ी बूंदें बन जाएं तो बादल फटने का चांस पैदा होता है. औसत से बड़ी बूंदें तब बनती हैं, जब बादल की बूंदे नीचे टपकने के बजाय ऊपर उठने लगें. अब आप कहेंगे कि न्यूटन पर सेब तो नीचे की ओर गिरा था, तो बूंदें ऊपर कैसे उठ जाती हैं. तो बात ये है कि जब गर्म हवा तेज़ी से ऊपर उठती है, तो कई बार बादलों की बूंदों को अपने साथ ऊपर उठा लेती है. ये बूंदें ऊपर तैर रही बूंदों से मिलकर और बड़ी हो जाती हैं. और जब बूंदें बादल में अटके रहने के लिए बहुत भारी हो जाती हैं, तो बरस पड़ती हैं.

Post a Comment

0 Comments