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मर्डर केस के बाद wrestler sushil kumar उत्तर रेलवे की नौकरी और स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) के अध्यक्ष पद से भी हो सकती है उनकी विदाई

 मर्डर केस के बाद पहलवान sushil kumar उत्तर रेलवे की नौकरी और  स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) के अध्यक्ष पद से भी हो सकती है उनकी विदाई


ओलंपियन सुशील कुमार को मर्डर के एक मामले में गिरफ्तार करने के बाद पुलिस कस्टडी में भेजा गया है.

ओलंपियन पहलवान सुशील कुमार को हत्या के मामले में गिरफ्तारी के बाद एक और झटका लगा है. खबर है कि सुशील कुमार अपनी उत्तर रेलवे की नौकरी से हाथ धो सकते हैं. दिल्ली सरकार ने उत्तर रेलवे में उनकी नौकरी एक साल बढ़ाने की अर्जी को खारिज कर दिया है. यही नहीं. छत्रसाल स्टेडियम में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) और स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) के अध्यक्ष पद से भी उनकी विदाई हो सकती है.

पहलवान सागर धनखड़ की हत्याकांड में शामिल होने के आरोप में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम ने रविवार 23 मई को सुशील कुमार को गिरफ्तार किया था. सुशील के साथी अजय उर्फ सुनील को भी पुलिस ने दिल्ली के मुंडका इलाके से अरेस्ट किया. अदालत ने सुशील को 6 दिन के लिए पुलिस कस्टडी में भेजा है.

सुशील कुमार उत्तर रेलवे में सीनियर कमर्शियल मैनेजर के पद पर 2015 से प्रतिनियुक्ति पर तैनात थे. उनका कार्यकाल 2020 तक बढ़ा दिया गया था. लेकिन वह इसे 2021 में भी बढ़वाना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने अर्जी दी थी. उत्तर रेलवे के PRO दीपक कुमार ने PTI को बताया कि


”रेलवे बोर्ड को इस मामले पर दिल्ली सरकार से रविवार को एक रिपोर्ट मिली है. उनके(सुशील कुमार) खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है. अब उन्हें सस्पेंड कर दिया जाएगा. इसका आधिकारिक आदेश अगले कुछ दिनों में जारी कर दिया जाएगा.”

sushil kumar


छत्रसाल स्टेडियम और SGFI से भी छुट्टी

उत्तर रेलवे में तैनात सुशील कुमार को दिल्ली सरकार ने छत्रसाल स्टेडियम में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) के तौर पर तैनात किया था. लेकिन अब यहां से भी उनकी छुट्टी तय मानी जा रही है. हाल ही में सुशील कुमार को स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) का अध्यक्ष भी बनाया गया था. उनका ये पद भी जा सकता है. वह भविष्य में SGFI अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के योग्य भी नहीं होंगे.

क्या सुशील कुमार से पदक वापस ले लिए जाएंगे?

हत्या के आरोप, लाखों का ईनाम और गिरफ्तारी के बाद सुशील कुमार की छवी दागदार हुई है. लेकिन अब जबकि वो पुलिस गिरफ्त में पहुंच गए हैं तो एक सवाल कई लोगों के ज़हन में है कि क्या सुशील कुमार को मिले अवॉर्ड या पदक उनसे वापस लिए जा सकते हैं?


इस पर हिन्दुस्तान वेबसाइट की रिपोर्ट में कानूनविद् पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता अमित साहनी ने कहा कि

”अभी तक के नियमों के अनुसार शारीरिक जांच में स्टिरॉइड मिलने पर ही किसी खिलाड़ी को दिए आवार्ड या जीते पदक वापस लिए जा सकते है. हालांकि केंद्र व दिल्ली सरकार अदालत में उनके दोषी पाए जाने के बाद खुद के दिए सम्मान वापस ले सकती है.”

लड़की से मदद मांगकर फंसा पहलवान

सुशील कुमार और उनके साथियों पर आरोप है कि 4 मई 2021 की रात उन्होंने पहलवान सागर धनखड़ को अगवा किया. उसके बाद छत्रसाल स्टेडियम में ले जाकर जमकर पीटा. सागर को इतनी बुरी तरह पीटा गया कि अस्पताल में उनकी मौत हो गई. पुलिस ने हत्या का केस दर्ज करके सुशील की तलाश शुरू कर दी. लेकिन सुशील सामने नहीं आए. दिल्ली पुलिस ने उनके ऊपर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित कर दिया. 19 दिन की मशक्कत के बाद 23 मई को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सुशील को गिरफ्तार कर लिया. उनके साथ गिरफ्तार अजय पर भी पुलिस ने 50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था. सरकारी स्कूल में फिजिकल एजुकेशन टीचर (PTI) के पद पर काम करने वाले अजय के पिता सुरेश बक्करवाला कांग्रेस के निगम पार्षद हैं.


आजतक को पता चला है कि सुशील के पास पैसे खत्म हो गए थे. इसके बाद उन्होंने वेस्ट दिल्ली के हरि नगर में रहने वाली एक लड़की से मदद मांगी थी. सुशील उस लड़की के घर गया. उसकी स्कूटी भी ले ली. बाद में इसी स्कूटी के साथ पुलिस ने सुशील को पकड़ लिया. ये भी पता चला है कि सुशील ने पुलिस के रडार पर आने के बाद फोन का इस्तेमाल बंद कर दिया था. वह इंटरनेट के जरिए अपने करीबियों के संपर्क में था.


सागर मर्डर केस में सुशील कुमार की गिरफ्तारी से क्या पहलवान-क्रिमिनल कनेक्शन के राज़ खुलेंगे?

ओलंपिक में दो मेडल जीतने वाले सुशील कुमार की गिरफ्तारी के बात नए नए राज सामने आ रहे हैं. फोटो उस समय की है, जब दिल्ली पुलिस ने सुशील को गिरफ्तार किया. फोटो- PTI

सुशील कुमार (Sushil Kumar). देश को दो ओलंपिक मेडल दिलाने वाला पहलवान. ओलंपिक पोडियम पर जब देश के झंडे को ऊपर उठते देखा, तो आंखें नम हो गई थी इस खिलाड़ी की. हैरानी भरी नजरों से उसने अपने दोनों हाथों को गालों पर लगा लिया था. ये बात है साल 2008 के बीजिंग ओलंपिक की. तब 66 किलो कैटिगरी में सुशील ने अपना पहला ओलंपिक मेडल जीता था. इस प्रतियोगिता में सुशील को कांस्य मिला था. लेकिन ये पदक और ये पल, उनके लिए बड़े गौरव की बात इसलिए भी थी कि कुश्ती में लंबे समय बाद किसी खिलाड़ी को मेडल मिला था. जीत की खुशी सुशील की आंखों से झलक रही थी. उनकी ये तस्वीर उस समय अखबारों और न्यूज चैनलों पर छाई रही थी.

रातों रात भारत के स्टार बन गए थे सुशील. फोटो- गेटी इमेजिज़, PTI

अब इसके साथ वाली तस्वीर को देखिए. इसमें एक शख्स तौलिए से अपना मुंह छिपाते दिखाई दे रहा है. ये तस्वीर भी सुशील कुमार की है. वही सुशील कुमार, जिसे आपने ओलंपिक पोडियम पर देश का झंडा ऊपर जाते देख भावुक होते देखा था. ऐसा क्या हुआ कि देश का नाम ऊंचा करने वाले खिलाड़ी को मुंह छिपाने की नौबत आ गई है. आप खबरों में रहते हैं तो ये तो पता होगा ही. लेकिन अब इस ओलंपियन का नाम गैंगस्टरों, बदमाशों के साथ भी जोड़ा जा रहा है. आरोप लग रहे हैं कि दिल्ली के नामी बदमाशों से सुशील कुमार का साबका रहा है. आइए तफसील से बताते हैं.

‘स्टेडियम में पीट-पीटकर ले ली जान’

देश को दो ओलंपिक मेडल दिलाने वाले सुशील कुमार इस वक्त पुलिस की हिरासत में हैं. सुशील और उनके साथियों पर आरोप है कि 4 मई 2021 की रात उन्होंने छत्रसाल स्टेडियम में पीट-पीटकर सागर धनखड़ नाम के पहलवान की हत्या कर दी. इसके अगले दिन से ही सुशील फरार थे. दिल्ली पुलिस ने सुशील पर एक लाख रुपये का इनाम भी रखा. 23 मई को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सुशील को गिरफ्तार कर लिया.

आजतक के अरविंद ओझा की रिपोर्ट के मुताबिक, फरारी के दौरान सुशील कुमार के पास पैसे खत्म हो गए थे. वह पैसे लेने दिल्ली आया था. पैसे लेकर वो वापस पंजाब की तरफ फरार होने की फिराक में था. तभी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. सुशील के साथ उसका साथी अजय बक्करबाला भी पकड़ा गया. बता दें कि नजफगढ़ में सुशील कुमार के गांव बापरोला के नजदीक ही बक्करवाला गांव है. अजय वहीं का रहने वाला है. अजय पर भी 50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था. सरकारी स्कूल में फिजिकल एजुकेशन टीचर (PET) पद पर काम करने वाला अजय कांग्रेस के नगर निगम पार्षद सुरेश बक्करवाला का बेटा है.

कभी सुशील का चेला रहा था सागर!

सुशील कुमार दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले छत्रसाल स्टेडियम में ओएसडी यानी ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी के पद पर हैं. हालांकि ये पद डेप्यूटेशन बेस्ड है. सुशील कुमार का होम डिपार्टमेंट उत्तर रेलवे है. उत्तर रेलवे में सुशील को बतौर सीनियर कमर्शियल मैनेजर की पोस्ट मिली हुई है. कुछ साल पहले उन्हें दिल्ली के किशन गंज स्थित उत्तर रेलवे कुश्ती अकादमी का इंचार्ज भी बनाया गया था. लेकिन 2015 से वह डेप्यूटेशन पर छत्रसाल स्टेडियम में काम देखने लगे.

रेलवे कुश्ती अकादमी में सुशील कुमार को जानने वाले कुछ पहलवानों से दी लल्लनटॉप ने बात की. उन्होंने दावा किया कि जिस पहलवान की हत्या का आरोप सुशील पर लगा है, वो कभी सुशील का ही चेला था. दिल्ली में पहलवानी से जुड़े कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दरअसल सागर ने सुशील के बारे में कुछ कह दिया था. उसी के बाद सुशील ने सागर को समझाने या कहो धमकाने के लिए बुलाया. इस दौरान झड़प हो गई. सागर को चोटें आईं और उसकी मौत हो गई. दिल्ली पुलिस के सूत्र इस झगड़े के विवाद को मॉडल टाउन के एक फ्लैट से जोड़कर भी देख रहे हैं.

Kushti Railway

उत्तर रेलवे कुश्ती अकादमी के इंचार्ज भी रहे हैं सुशील.

पहलवान लॉबी में धाक जमाने की चाहत!

सुशील कुमार ने 4 मई को छत्रसाल स्टेडियम में पहलवान सागर की पिटाई का वीडियो भी बनवाया था. आजतक के अरविंद ओझा ने पुलिस के हवाले से बताया कि ऐसा इसलिए किया ताकि पहलवान लॉबी में वीडियो को वायरल कर धाक जमा सके. लेकिन सागर की मौत हो गई. पुलिस का दावा है कि सुशील ने प्रिंस नाम के युवक को सागर की पिटाई का वीडियो बनाने के लिए कहा था. अब प्रिंस के मोबाइल से दिल्ली पुलिस ने ये वीडियो बरामद कर लिया है. इसमें सुशील साफ दिख रहा है. बताया जा रहा है कि पुलिस ने वीडियो की फरेंसिक जांच भी करवाई है. इससे भी वीडियो में सुशील कुमार के होने की पुष्टि हुई है.


पहलवान-क्रिमिनल गठजोड़?

सुशील और सागर के बीच झगड़े में एक और शख्स घायल हुआ था. उसका नाम है सोनू महाल. ये सोनू महाल कौन है?उसका सुशील के साथ झगड़े से क्या लेना देना है? दी लल्लनटॉप ने इस बारे में दिल्ली में बड़े अखाड़ों के संचालकों और कोच से बात की. उन्होंने बताया कि सागर पहलवान कोई प्रोफेशनल पहलवान नहीं था. वह पहलवानी छोड़ चुका था. उनका आरोप है कि सागर अवैध कब्जे करने, मकान-कोठी आदि खाली कराने जैसे काम भी करता था. सुशील के साथ झगड़े में घायल हुआ सोनू महाल सागर का दोस्त था. सोनू मोस्ट वांटेड क्रिमिनल है.

सोनू महाल दिल्ली और हरियाणा के वांटेड क्रिमिनल संदीप काला उर्फ काला जठेड़ी का भांजा है. सोनू पर 19 आपराधिक मामले दर्ज हैं. ऐसे भी आरोप सामने आ रहे हैं कि सुशील भी काला जठेड़ी के सम्पर्क में था, लेकिन इस झगड़े में बात बिगड़ गई. काला जठेड़ी हरियाणा का रहने वाला है. फिलहाल फरार है. काला का सपना नॉर्थ इंडिया में जुर्म का बादशाह बनने का रहा है, ऐसा बताया जाता है.

संदीप काला उर्फ काला जठेड़ी हरियाणा का रहने वाला है, फिलहाल फरार है.

सुशील और नीरज बवाना गैंग का लिंक?

छत्रसाल स्टेडियम में सुशील और उसके साथियों पर सागर धनखड़ के अलावा सोनू महाल और अमित नाम के शख्स की पिटाई का भी आरोप है. आजतक ने पुलिस सूत्रों के हवाले से दावा किया कि इस वारदात के दौरान सुशील कुमार के साथ दिल्ली के कुख्यात गैंगस्टर नीरज बवाना के गुर्गे भी थे. नीरज बवाना पर एक वक्त दिल्ली पुलिस ने 5 लाख का इनाम रखा था. दो साल पहले पुलिस उसे गिरफ्तार कर चुकी है. लेकिन आरोप लगते रहे हैं कि नीरज जेल से अपना गैंग चलाता है. सागर हत्याकांड के बाद पुलिस को मौके से एक स्कॉर्पियो गाड़ी मिली थी. वह नीरज बवाना के मामा रामबीर शौकीन के गांव में रहने वाले शख्स की है. रामबीर पूर्व विधायक है और फिलहाल मकोका में जेल में बंद है.

क्राइम की दुनिया में पहलवानों का इस्तेमाल

दिल्ली में जमीनों पर कब्जा करने के लिए पहलवानों का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है. दिल्ली के कुछ पहलवानों से बात करने पर पता चला कि ऐसे पहलवान कुछ समय बाद खुद भी इस धंधे में शामिल हो जाते हैं. ब्याज पर पैसा देने वाले कई व्यापारी भी वसूली के लिए पहलवानों का इस्तेमाल करते हैं. दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, वेस्ट और आउटर दिल्ली में ऐसे कई व्यापारी हैं, जो ब्याज पर पैसे देते हैं. जब कोई शख्स पैसे नहीं लौटता तो उसकी प्रॉपर्टी के कागजात पहलवानों के दम पर अपने नाम लिखवा लेते हैं.

आजतक के तनसीम हैदर के मुताबिक, दिल्ली में गैंगस्टर और पहलवानों का नेक्सस करीब 25 साल पहले शुरू हुआ था. 1989 में नजफगढ़ के ढिचाऊं और मितराऊं गांव में गैंगवार की शुरुआत कृष्ण पहलवान ने की थी. कृष्ण पहलवान ने 1992 में अपने ही रिश्तेदार रोहतास की हत्या कर दी थी. इस गैंगवार में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की जानें जा चुकी हैं. इसके पीछे वर्चस्व की लड़ाई बताई जाती है. कृष्ण पहलवान ढिचाऊं कला का है, जबकि अनूप बलराज मितराऊं गांव का रहने वाला था. एक प्लॉट को लेकर इनके बीच गैंगवार शुरू हुई, जो आज भी अंदर ही अंदर सुलग रही है.

दिल्ली पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पिछले एक साल में 2 दर्जन से ज्यादा पहलवानों पर हत्या, हत्या के प्रयास, धमकी देने और मारपीट के मुक़दमे दर्ज हो चुके हैं. इनमें से ज्यादातर या तो किसी अखाड़े के विवाद से जुड़े रहे हैं, या फिर किसी पब-बार में बाउंसरों का ठेका लेकर इस फील्ड में आ गए.

दिल्ली-हरियाणा के पहलवानों पर पहले भी गंभीर आरोप लगते रहे हैं, लेकिन सुशील कुमार का मामला कुछ अलग है. वह देश के सबसे नामी पहलवान हैं. अब देखना ये है कि सुशील को लेकर आगे क्या-क्या खुलासे होते हैं.

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